विश्व के लिए अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक का संदेश
गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एण्ड इंजीनियर्स (जीआरएसई) लिमिटेड भारत सरकार की नीति “मेक इन इंडिया - मेक फॉर वर्ल्ड” के अनुरूप अपनी वैश्विक उपस्थिति का विस्तार कर रहा है। भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक के लिए अत्याधुनिक युद्धपोतों के निर्माण में हमारी विशेषज्ञता के साथ, हम मित्र विदेशी देशों में नौसैनिक प्लेटफॉर्म के व्यावसायिक अवसरों को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहे हैं। जीआरएसई द्वारा निर्मित युद्धपोत मित्र देशों को पहले ही निर्यात किए जा चुके हैं। साथ ही, जीआरएसई वाणिज्यिक प्लेटफॉर्म के अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर प्राप्त करने के लिए भी उत्सुक है। हालिया प्रदर्शन ने विदेशी देशों के लिए जटिल वाणिज्यिक प्लेटफॉर्म संभालने में हमारी दक्षता और क्षमता सिद्ध की है। आने वाले दिनों में जीआरएसई हरित प्लेटफॉर्म के क्षेत्र में भी अग्रणी बनकर वैश्विक आवश्यकताओं को पूरा करेगा।
पृष्ठभूमि संगीत चल रहा है
जीआरएसई ऐतिहासिक टाइमलाइन
-
1884
जीआरएसई की स्थापना
हुगली नदी के तट पर पुराने नदीय पोतों की मरम्मत के लिए एक छोटे रिवर स्टीम वर्कशॉप के रूप में शुरुआत।
-
1939–1945
द्वितीय विश्व युद्ध
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 4000 से अधिक पोतों का निर्माण, रूपांतरण और मरम्मत की।
-
1960
भारत सरकार द्वारा अधिग्रहण
भारत सरकार द्वारा अधिग्रहित।
महत्वपूर्ण लिंक
नवीनतम कार्यक्रम
कमोडोर राजीव श्रीधरन, भा. नौ. (सेवानिवृत्त), सीजीएम (डिजाइन) के नेतृत्व में टीम जीआरएसई ने आईएसबी हैदराबाद में “Empowering Atmanirbhar Bharat: India's Aerospace & Defence Manufacturing Summit” में भाग लिया
“आत्मनिर्भर भारत” को बढ़ावा देने की भावना के साथ भविष्य की परस्पर प्रगति हेतु जीआरएसई और आंध्र प्रदेश मैरिटाइम बोर्ड ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए