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वर्षों से जी.आर.एस.ई. ने इन- हाउस डिजाइन एवं पोत निर्माण क्षमता विकसित की और हमारे देश के देशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम में पर्याप्त योगदान दिया। शिपनिर्माण उत्पाद लाईन ने अपना दायरा तकनीकी तौर पर अत्याधुनिक फ्रिगेट एवं कॉरवेट से तेज गश्ती जलयान तक बढ़ाया। विगत पाँच दशकों में, जी.आर.एस.ई. ने छोटे से लेकर बड़े तक तथा उन्नत जलयानों का निर्माण एवं डिलिवरी किया, जिनमें शामिल थे- फ्रिगेट, एण्टी सबमेरीन वारफेयर कार्वेट, मिसाइल कॉरवेट, लैडिंग शिप टैंक, लैंडिग क्राफ्ट तथा फास्ट इंटरसेप्टर बोट, जो भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक, एम.एच.ए. एवं अन्य देशों की सरकारों के लिए थे। जी.आर.एस.ई. ने कॉस्ट लाइन की निगरानी के लिए लोगों एवं सामाग्री वहन करने के लिए 750 जलयानों से अधिक का निर्माण एवं आपूर्ति की । वर्षों से कंपनी ने भारतीय रक्षा सेवाओं की विभिन्न पोत निर्माण संबंधी जरूरतों का पूरा किया है तथा साधारण जलयानों से लेकर बड़े एवं तकनीकी तौर पर उन्नत युद्धपोतों के निर्माण तक अपने को विकसित किया है।

वर्तमान में जी.आर.एस.ई. के पास तीन अलग – अलग पोत निर्माण सुविधाएं हैं, जो कि सभी कोलकाता (भारत) में एक दूसरे के निकट अवस्थित हैं। पोतों का निर्माण मेन वर्क्स यूनिट तथा राजाबागान डॉकयार्ड में किया जाता है। तीसरी फेसिलिटी एफ़ओजे यूनिट का प्रयोग मुख्यतया पोतों  की फिटिंग तथा मरम्मत के लिए किया जाता है। राजाबागान डॉकयार्ड का अधिग्रहण सेण्ट्रल इनलैण्ड वाटर ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन लिमिटेड से वर्ष 2006 में किया गया था। डी.ई.पी. यूनिट मेरीन प्रपल्सन इंजनों की ओवरहॉलिंग तथा परीक्षण तथा डीजल इंजनों की सेमी-नॉक्ड डाउन यूनिटों के असेम्बली से जुड़ी है जबकि इंजीनियरिंग सेगमेण्ट पोर्टेबल स्टील के पुलों के उत्पादन एवं फ्रेबिकेशन, पोतों एवं मेरीन पंपों के लिए डेक मशीनरी से संबंद्ध है।

वर्षों से जी.आर.एस.ई. को भारतीय पोत निर्माण उद्योग में कई में प्रथम होने का श्रेय प्राप्त है। उदाहरण के लिए, भारतीय नौसेना के लिए अपनी तरह के तीसरे एएसडबल्यू कोर्वेट के निर्माण के लिए स्टील हल के साथ कंपोजिट सुपर स्ट्रक्चर को जोड़ने वाला यह पहला शिपयार्ड है, जिसने वज़न को कम किया तथा पोतों के स्थायित्व को बढ़ाया। अन्य उपलब्धियों में वर्ष 2000 में जी.आर.एस.ई. भारतीय नौसेना को एक फ्लीट टैंकर एवं भारतीय तटरक्षक को होवरक्राफ्ट का निर्माण एवं आपूर्ति करने वाला पहला और एकमात्र भारतीय शिपयार्ड बन गया। भारतीय नौसेना के लिए अबतक का पहला देशी युद्धपोत (आई.एन.एस. अजय) की आपूर्ति में प्रथम होने के अतिरिक्त ये सभी हैं। 5 सितंबर, 2006 को जी.आर.एस.ई.  को भारत सरकार के भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक उद्यम विभाग द्वारा अनुसूची-बी. एवं मिनी रत्न-श्रेणी-। कंपनी का दर्जा दिया गया। कंपनी को कई पुरस्कारों से भी नवाज़ा गया, जिनमें शामिल है- रक्षामंत्री की ट्राफी, सर्वोत्तम कार्य निष्पादन शिपयार्ड पुरस्कार (लगातार चार वर्षों 2010-11, 2011-12, 2012-13 एवं 2013-14 तक) माननीय रक्षा मंत्री से, रक्षा मंत्री की ट्राफी “बेस्ट इन-हाउस डिजाइन एफर्ट” 30 मई 2017 को मारीशस सी.जी.एस.एस.बाराकुडा के लिए आदि।

जी.आर.एस.ई. उद्योग में कई तकनोलॉजी फर्मों के साथ भी निरंतर जुड़ी हुई है-जैसे एमटीयू तथा अन्य अंतर्राष्ट्रीय/घरेलू संस्थाएं। यह डीजल इंजन तथा डेक मशीनरी जैसे इसके विभिन्न व्यवसायों के लिए है, जिसने अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसकी विश्वसनीयता बढ़ा दी है।

जी.आर.एस.ई. ने प्रतिभागी बोली के जरिए भारतीय नौ सेना के लिए 4 (चार) सर्वे वैसल (बड़े) के लिए ठेका हासिल किया है। यह शिपयार्ड भारतीय नौ सेना के लिए 8 एण्टी –सबमेरिन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW SWC) के लिए अन्य प्रतियोगी बोली में एक सफल बोलीदाता के रूप में घोषित किया गया है।

प्रतियोगी  ताकत

जीआरएसई मानता है कि हम निम्नलिखित ताकतों से लाभान्वित होते हैं,जो एक साथ मिलकर हमें अन्य प्रतियोगियों से भिन्न करती हैं ।

 

क्वालिटी उत्पाद प्रदान करने के लिए आधुनिक निर्माण प्लेटफार्म तथा एकीकृत पोत निर्माण सुविधाएं

जीआरएसई मानता है कि हमारे शिपयार्ड  में उपलब्ध हमारी आधुनिक ढांचागत सुविधाएं हमारी वृहद दक्षता के साथ देश के अन्य प्रतियोगी सीपीआरओ के ऊपर महत्वपूर्ण तीक्ष्‍णता प्रदान करती है। हमारी कंपनी प्रक्रियाओं एवं पद्धतियों में सरलीकरण  सुनिश्चित करने, आधुनिक कार्य पद्धति को तथा टेक्नोलॉजी को अपनाने, क्षमता बढ़ाने, संरचना को आधुनिक बनाने एवं अभिशासन में सुधार करने हेतु कदम उठा रही है  ।

हाल के वर्षों में जीआरएसई ने अपनी संरचना के प्रमुख आधुनिकीकरण को अपने हाथ में लिया है । वर्ष 2013 में हमने अपने मेन वर्क्स यूनिट में नई एकीकृत पोत निर्माण सुविधा को विकसित किया है, जो युद्धपोत बनाते समय मॉडलर निर्माण का प्रयोग करने की अनुमति देती है, जिससे पोत निर्माण अवधि को कम करने, एकीकृत निर्माण  टेक्नोलॉजी का प्रयोग करके क्वालिटी में सुधार करने तथा पोत निर्माण उद्योग में वैश्विक पद्धति के अनुकूल पोतों का निर्माण करने में हमारी मदद करती है । वर्तमान में, हमारी सुविधाओं में 8 बड़े पोत और 12 मध्यम/ छोटे पोत बनाने में मदद की है । इसके अलावा हमने नए हल शॉप , बड़े ब्लॉक एकीकरण के लिए मॉड्यूल शॅाप एवं हाई डॉक एवं बर्थ निर्माण किया है । हमारा विश्वास है कि प्रमुख  वर्क्‍स  यूनिट में अत्यंत संक्षिप्त अवधि में बड़ी संख्या में युद्धपोत बनाने में हमारी उन्नत मॉड्यूलर निर्माण तकनीक हमारी मदद करेगी ।  हमारी प्रमुख वर्क्स यूनिट को हमारे एफओजे इकाई द्वारा सहयोग मिलता है, जो कि पोतों की मरम्मत तथा फिटिंग आउट के प्रति समर्पित है । फिटिंग आउट के  उपरांत जलयानो का फ्लोट आउट तथा  समुद्री पूर्व प्रशिक्षण कराया जाता है । हमारी कंपनी की इनहाउस सुविधाएं जब कभी जरूरत पड़ती है तब कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के ड्राइ डॉक को किराए पर लेकर बढ़ाई भी जाती है ।  हमारी कंपनी ने  हमारे द्वारा निर्मित पंपों के परीक्षण हेतु 11 जून 2018 को तारातला यूनिट में आधुनिक पंप परीक्षण बेड का हाल ही में उद्घाटन किया है ।

जबकि हम अपनी संरचना को बढ़ा रहे हैं साथ ही साथ डिजाइन क्षमताओं में अत्यंत नई टेक्नोलॉजी पद्धति में उन्नयन एवं सुधार, क्वालिटी पहलों का अंगीकरण  हाथ में लिया गया है तथा  चालू है ।  हमारी निर्माण क्षमता में और वृद्धि के लिए हम छोटे एवं मध्यम जहाजों के निर्माण एवं फिटिंग आउट के लिए विशेष रूप से राजाबागान डॉकयार्ड का प्रयोग करते हैं और अधिक छोटे एवं मध्यम जहाजों के निर्माण के लिए राजाबगान डाकयार्ड सुविधाओं को उन्नत किया जा रहा है ।

इतना ही नहीं हम ने वर्ष 2016 में  रांची में अपनी डीईपी यूनिट के आधुनिकीकरण को पूरा किया है आधुनिकीकरण में शामिल था - एक नए अत्याधुनिक डीजल इंजन असेंबली शॉप का सृजन, जिससे धूल एवं नमी से सुरक्षित वातावरण में इंजन की ओवरहालिंग तथा असेंबली करने में मदद मिलेगी । हमारे ‘’आधुनिक डीजल इंजन असेंबली शॉप’’ के चालू हो जाने से हमें विश्वास है कि डीईपी यूनिट अगली पीढ़ी के मरिन डीजल इंजनों का कार्य   हाथ में लेने को तैयार है तथा ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अधीन मेरिन डीजल इंजनों का उत्पादन करने में यह और आगे रहेगा ।

 

हम  आदि से अंत तक समाधान प्रदान करते हैं

हमारी कंपनी के पास समर्पित केंद्रीय डिजाइन कार्यालय (“सीडीओ”) है जो डिजाइन तथा अनुसंधान एवं विकास का कार्य करता है । जिसमें शामिल है आज की तारीख में 100  सदस्यों का अत्यंत कुशल कार्यबल , जिनमें अधिकांश आईआईटी एवं अन्‍य प्रमुख संस्‍थानों से योग्य इंजीनियर हैं। हमारी सीडीओ टीम  नौसेना वास्तुकला संबंधी डिजाइन एनएपीए, अवीवा मेरीन से लेकर ड्राफ्टिंग कार्य के लिए ऑटो सीएडी तथा स्‍ट्रक्‍चरल विश्‍लेषण के लिए अन्‍य सॉफ्टवेयरों सहित विभिन्‍न प्रकार के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करती है । अपने समर्पित सीएडी टीम के साथ हमने जटिल युद्धपोत डिजाइन का कार्य करने मे अभिनव मानदंड हासिल किया है ।  जिनमें से कुछ हैं – लैंडिंग क्राफट यूटिलिटी मार्क IV जो कि 15 नॉट स्‍पीड सहित एक इन हाउस डिजाइन उत्‍पाद है , जो कि इस आकार – प्रकार के जलयान के लिए अनूठा है ऐसा हमारा विश्‍वास है । इसके अतिरिक्‍त्‍ हमारी कंपनी ने 1 जून 2018 को सीडीओ के डाटा सेंटर का उद्घाटन किया है तथा 61 पार्क यूनिट में 7 जुलाई 2018 को एक वर्चुअल लैब का उद्घाटन किया है ।

हमारा विश्‍वास है कि अपने ग्राहको को उत्‍पाद अवधारणा , डिजाइन, सिस्टम्‍ एकीकरण तथा परियोजना प्रबंधन से लेकर शुरू से अंत तक समाधान प्रदान करने की योग्‍यता ने अपने ग्राहको की मांग पूरा करने की हमारी क्षमता को बढ़ाया है जब किसी ग्राहक के पास कोई परियोजना प्रस्ताव होता है तो डिजाइन स्‍तर से लेकर तैयार उत्पाद की डिलीवरी तक संपूर्ण परियोजना को पूरा करने के लिए हम अपने संसाधनों का उपयोग करते हैं । यह हमारे ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के संबंध में हमारी समझ को वर्द्धित स्‍तर प्रदान करता है । हमें यह भी विश्वास है कि जहाजों की डिजाइन करने से, जिसकी हम डिलिवरी करते हैं, हमें निर्माण किये जाने वाले जहाजों की बेहतर समझ और निर्माण प्रक्रिया के ऊपर नियंत्रण प्राप्‍त होता है। इसका कारण है कि हम परियोजना का पूरा प्रबंधन करते हैं, क्‍योंकि छोटे/मध्‍यम एवं बड़े जहाजों का प्रबंधन स्‍वतंत्र रूप से करने के लिए उत्‍पादन लाइन के प्रति समर्पित हैं । हमें भरोसा है कि जो जहाज निर्माण में भाग लेते हैं, उन प्रतियोगियों में से कुछ के संबंध में हमें कार्यकुशलता हासिल होती है, परन्‍तु वे प्रतिद्वंदी परियोजना के अन्‍य स्‍तरों में भाग नहीं लेते हैं । हमारा विश्‍वास है कि हमारे ग्राहकों से संबंधित किसी आर्डर को पूरा करने के लिए तीसरी पार्टियों पर निर्भरता से हम काफी बच जाते हैं ।

 

भारतीय नौसेना एवं भारतीय तटरक्षक के साथ मजबूत एवं स्‍थायी संबंध

भारतीय नौसेना तथा भारतीय तटरक्षक के साथ हमारे लम्‍बे संबंध हैं । भारतीय नौसेना के साथ हमारे संबंध और अनुभव पॉंच दशकों से अधिक पुराना है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1961 में हुई, जब हमने पहला देशी युद्धपोत आईएनएस अजय की डिलिवरी भारतीय नौसेना को की थी । इन संबंधों ने जहाजनिर्माण परियोजनाओं को सुरक्षित करने का मौका दिया । कुल मिलाकर हमने 98 (अठानबे) जहाज भारतीय नौसेना और भारतीय एवं मॉरीशस तटरक्षक को डिलिवरी की । हमारे ऐतिहासिक प्रचालन तथा वर्तमान प्रचालन में संतोषजनक स्‍तर का प्रदर्शन किया गया तथा साथ ही भारतीय नौसेना तथा भारतीय तटरक्षक के साथ हमारे गहरे संबंधों को भी ।

जीआरएसई एकमात्र स्वदेशी पोतनिर्माता कंपनी है जिसने भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक हेतु कुछ एतिहासिक उपलब्धियां हासिल किया । उदाहरण के लिए 2000 में, हम पहले एवं एकमात्र भारतीय शिपयार्ड बन गए, जिसने भारतीय नौसेना को एक फ्लीट टैंकर का निर्माण कर डिलिवर किया तथा बाद में होवर क्राफ्ट का निर्माण और तटरक्षक को डिलिवर किया । पुन: वर्ष 2009 में, भारतीय नौसेना के लिए एक लैंडिंग शिप का निर्माण एवं डिलिवर करने वाला पहला और एकमात्र शिपयार्ड हम बने। वर्ष 2017 में, हमारी कंपनी के इतिहास में पहली बार, भारतीय नौसेना के लिए एक युद्धपोत का निर्माण एवं डिलिवरी की, जिसमें हथियार और सेंसर ट्रायल लगे हुये थे, जो कि तब तक विभिन्‍न भारतीय नौसेना की फेसिलिटियों में किया जाता था (स्रोत: आईसीआरए) । इसके अलावा, हमने आईएनएस किल्‍टन, एक एण्‍टी –सबमेरीन वारफेयर स्‍टील्‍थ कारवेट का निर्माण एवं डिलिवरी किया और वर्ष 2017 में समूचे कंपोजिट मटेरियल से निर्मित सुपरस्‍ट्रक्‍चर सहित पहला भारतीय युद्धपोत । भारतीय नौसेना तथा भारतीय तटरक्षक के लिए विभिन्न (कई) योजनाएं भी हमारे पास   हैं ।

 

ठोस ऑर्डर बुक

31 जुलाई 2018 को हमारे पास कुल रु. 203,136.10 मिलियन का ऑर्डर बुक था। हमारा विश्वास है कि हमारा वर्तमान ऑर्डर बुक राजस्‍व उत्‍पन्‍न  करने वाली योजनाओं का एक गहरा  लाभकोष प्रदान करता है तथा हमारे आर्डर बुक से उत्पन्न राजस्व हमारी डिजाइन क्षमता तथा सुविधाओं में निवेश करने की अनुमति देगा, ताकि हम अधिक कार्यकुशल एवं तकनीकी रूप से अत्याधुनिक बन सकें । इनमें से कई जहाज बड़े उन्‍नत जलयान है,  जो हमारे द्वारा निर्मित जहाजों का महत्‍वपूर्ण लाभ मुनाफा प्रदान करता है । शिपनिर्माण के जिन करारों में हमने अपने ग्राहकों के साथ प्रवेश किया है वे वर्गीकरण सोसायटी के वर्गीकरण एवं जलयानों के विशिष्ट विवरण पर सहमति दर्शाते हैं, जिसके साथ जलयानों को प्रमाणित किये  जाने की मंशा है । विशिष्ट रूप से जलयान  के निर्माण कार्य का कोई अंश उप -  ठेकेदार को देने की हमें अनुमति प्राप्त है, कुछ प्रमुख उप ठेके के कार्य के अलावा जैसे कि मुख्य हल स्ट्रक्चर तथा सुपर स्‍ट्रक्‍चर, जिसके लिए हमें ग्राहक से पूर्व अनुमोदन की जरूरत होती है ।

 

मेक इन इंडिया पहल

भारतीय नौसेना तथा तटरक्षक के लिए जलयान निर्माण का ठेका प्राप्त करने में वैश्विक शिपयार्डों  के ऊपर हमें लाभ प्राप्त है , क्योंकि डीपीपी के अधीन “मेक इन इंडिया” पहल के लिए हमें योग्यता प्राप्त है । “मेक इन इंडिया” पहल  देश के निर्माताओं को एक प्रतियोगी लाभ स्‍वीकृत करता है, जब घरेलू बाजार में आपूर्ति करता है । रक्षा मंत्रालय देश में डिजाइन की हुई वि‍कसित एवं निर्मित (“आईडीडीएम”) उत्पादों को पूंजीगत क्रय के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता देता है । हमारे बहुमूल्य ग्राहक भारतीय नौसेना एवं भारतीय तटरक्षक घरेलू बाजार का अंश गठित करते हैं तथा कुछ परिस्थितियों में वैश्विक शिपयार्डों के ऊपर हमें पर एक वरीयता देते हैं।  मेक इन इंडिया पहल के अंश के रूप में विगत कुछ वर्षों के ऊपर देशीकरण के प्रतिशत में वृद्धि के लिए आंतरिक रूप से हमने पर्याप्त प्रयास किया है। गत वर्ष के दौरान उत्पादन के मूल्य के संबंध में हमारे उत्पादों के देशीकरण में हमने महत्वपूर्ण प्रगति की है।

 

व्यवसाय का विविधीकरण

शिपनिर्माण हमारा प्रमुख उत्पाद ऑफरिंग है। शिपनिर्माण के लिए हमारी कोर उत्पादन गतिविधियों के अतिरिक्त विविध उत्पाद एवं सेवाएं अपने ग्राहकों को ऑफर करते हैं, जिनमें शामिल हैं पोर्टेबल पुल, डेक मशीनरी आइटम, पंप एवं इंजन। हम अपनी 61 पार्क इकाई एवं तारातला इकाई में पुल तैयार करते हैं, जिससे शिपनिर्माण आय स्‍ट्रीम के आवर्ती प्र‍कृति को प्रति संतुलित करने में मदद मिलती है । हमारा विश्वास है कि हमारा उत्पाद विविधीकरण हमें राजस्‍व अर्जन के लिए विभिन्न उत्‍पाद क्षेत्रों पर निर्भर रहने की अनुमति देता है, जब बाजार की स्थिति शिपनिर्माण की मांग में कमी दर्शाती है ।

इतना ही नहीं,  भारत में किसी अन्य शिपयार्ड की हमें जानकारी नहीं है,  जिसके पास डेक मशीनरी उपकरण सुविधा अथवा इंजन असेंबली एवं परीक्षण सुविधा उपलब्ध हो, जिनमें से दोनों को ही शिप- निर्माण एवं परीक्षण प्रक्रिया के लिए हम महत्वपूर्ण मानते हैं। इन सुविधाओं के अभाव में हमारे प्रतिद्वंद्वियों को इनसे जुड़े कार्य को पूरा करने के लिए तीसरी पार्टियों से संपर्क करना पड़ता है। हमारा विश्वास है कि इस सीधे एकीकरण से अत्यंत समय कुशल तरीके से जहाज तैयार करने में हमें मदद मिलती है -क्योंकि हम तीसरी पार्टियों पर आश्रित नहीं होते हैं।

 

अनुभवी कार्यबल

हमारा विश्वास है कि हमारी योग्य एवं अनुभवी प्रबंधन टीम तथा तकनीकी तौर पर कुशल कर्मचारी आधार हमारे परिचालन तथा इन-हाउस प्रक्रियाओं एवम योग्यताओं को विकसित करने में योगदान देते हैं। हमारी मानव संसाधन नीतियों का लक्ष्य है- संस्थागत ज्ञान एवं कुशलता में वृद्धि। हमारा  मानव संसाधन विकास विभाग हमारे कर्मचारियों के ज्ञान एवं कुशलता को और विकसित करने के लिए सक्रिय पहल करता है।

हमारी वरिष्ठ प्रबंधन टीम में शामिल हैं- तकनीकी दृष्टि से योग्‍य एवं अनुभवी पेशेवर, जिनके पास है शिपनिर्माण,  डिजाइन एवं इंजीनियरिंग, ऑर्डर प्रबंधन, परिचालन, मानव संसाधन, वित्त एवं बिक्री उपरांत सेवाओं में गहन अनुभव । हम नैतिक निष्ठा के उच्च मानकों में विश्वास करते हैं तथा सुनिश्चित करते हैं कि हमारे सभी व्यावसायिक कार्य पारदर्शी तरीके से किए जाएं।  हमारा विश्वास है कि हमारे प्रतिभावान तथा अभिप्रेरित कर्मचारी अभी तक हमारी सफलता की चाबी रहे हैं और भावी विकास अवसरों में पूँजीबद्ध करने में आगे भी हमारी मदद करेंगे ।

 

ऐतिहासिक पृष्ठभूमिः-

वर्ष 1884 से तथा लिमिटेड कंपनी के रूप में स्थापित होने से पूर्व जी.आर.एस.ई. जहाज निर्माण प्रचालन तथा मरम्मत वर्कशॉप के व्यवसाय से स्थापित एण्टिटी के रूप में जुड़ी हुई थी। कंपनी 26 फरवरी 1934 को गार्डेन रीच वर्कशॉप लिमिटेड के रूप में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज कोलकाता के पास कंपनी अधिनियम 1913 के अधीन पंजीकृत हुई थी। इसने अपना नाम 5 नवंबर 1957 को “गार्डेन रीच वर्कशॉप प्रा. लि.” के रूप में परिवर्तित कर लिया था । वर्ष 1960 में भारत सरकार द्वारा इसका अधिग्रहण किया गया था और तब से इसकी शेयर पूंजी पूर्ण रूप से भारत के राष्ट्रपति और समय – समय पर उनके नॉमिनी के पास स्वामित्व में है। इसके बाद कंपनी ने अपना नाम बदल कर 30 नवंबर 1961 को “गार्डेन रीच वर्कशॉप लिमिटेड” कर लिया, भारत सरकार द्वारा कंपनी का अधिग्रहण करने के अनुसरण में। कंपनी का नाम एक बार फिर“गार्डेन रीच वर्कशॉप लिमिटेड” से बदलकर “गार्डेन रीच शिपबिल्डर्स एण्ड इंजीनियर्स लिमिटेड” 31 दिसंबर 1976 को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज, पश्चिम बंगाल द्वारा निगमन प्रमाणपत्र जारी करने के अनुसरण में कर लिया गया । दिनांक 25 अगस्त, 2017 को आयोजित वार्षिक आम बैठक में शेयर धारकों के विशेष संकल्प के अनुसरण में जी.आर.एस.ई. एक सार्वजनिक कंपनी बन गयी।

 

Registered and Corporate Office

Garden Reach Shipbuilders & Engineers Limited

43/46, Garden Reach Road

Kolkata – 700 024

West Bengal, India

Tel: +91-33- 24698100-8113

Fax: +91-33-24698150

Email Id: This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.

Website: www.grse.in

Corporate Identity Number: U35111WB1934GOI007891

Registration Number: 007891

 

Address of the Registrar of Companies

Our Company is registered with the RoC, West Bengal situated at Nizam Palace, 2nd MSO Building, 2nd floor, 234/4, A.J.C.B. Road, Kolkata – 700 020, West Bengal, India.

 

निदेशक मण्डलः-

इस रेड हेरिंग प्रास्पेक्टस की तारीख को निदेशक  मण्डल में गठन की निम्नलिखित सारणी थीः-

 

Name and Designation

DIN

Address

RAdm Vipin Kumar Saxena, IN (Retired)

Chairman & Managing Director

07696782

11, New Road, Alipore, Kolkata - 700 027, West Bengal, India

Sarvjit Singh DograDirector (Finance) & CFO (Whole Time Director)

07052300

27, Chetla Central Road, Flat 2B, 2nd Floor, Kolkata - 700 027, West Bengal, India

Asit Kumar Nanda Director (Personnel)         (Whole Time Director)

07506042

Shantikunj, P-374, Nalini Ranjan Road, New Alipore, Kolkata - 700 053, West Bengal, India

Cmde Sanjeev Nayyar, IN (Retired)             Director (Shipbuilding)                                     (Whole Time Director)

07973950

Flat No. 18D, Tower D (Cedar), South City Residence, 375, Prince Anwar Shah Road, Kolkata – 700 068 West Bengal, India

Ashwani Kumar Mahajan                         Government Nominee Director

07483427

D-09, Hudco Place Extension, Andrews Ganj, New Delhi – 110 049, India

Bharat Bhushan

Part-Time Non-Official (Independent) Director

00262278

C-11, Ahinsa Vihar, Sector 9, Rohini, Delhi - 110 085, India

Kanwaljit Deol                                                       Part-Time Non-Official (Independent) Director

03192289

A-78, NSG Society, P6, Gautama Buddhnagar, Greater Noida - 201 310, Uttar Pradesh, India

Dr. Ajai Bhandari                                                   Part-Time Non-Official (Independent) Director

00322233

Suraj Kunj Building, Sector-5, Shimla -171009, Himachal Pradesh, India

RAdm Inder Paul Singh Bali, IN (Retired)          Part-Time Non-Official (Independent) Director

07912223

C-1/11, Bapanagar, Zakir Hussain Marg, New Delhi – 110001, India

Dr. Biswapriya Roychoudhury                            Part-Time Non-Official (Independent) Director

08200896

Fulbari, Manaskamana Road, English Bazar, Malda, West Bengal-732101

 

रणनीतिः-

भारतीय नौ सेना तथा भारतीय तट रक्षक के लिए युद्धपोतों के निर्माण के भावी ऑर्डर को देखते हुए अगले दशक में वर्तमान ग्राहक अकेले ही पूरी क्षमता उपयोग के साथ मजबूत ऑर्डर बुक के लिए अवसर प्रदान कर सकते हैं। इसके अलावा, बाहरी देशों से भी ऑर्डर की संभावनाओं पर ध्यान दिया जाता है। पूरे उत्पादों तथा ग्राहक आधार के विविधीकरण एवं भौगोलिक पदचिह्नों की विपणन सहभागिता में निरंतर वृद्धि होने का एक संकल्प भी है जिससे सिर्फ क्षेत्रों विशेष, बाजार एवं ग्राहकों का अधिकतम एक्सपोजर होगा। सेबी (SEBI) के छूट पत्र-। के अनुसरण में रक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन एक संस्था, होने के नाते जी.आर.एस.ई. को अपनी रणनीति घोषित करने से छूट प्राप्त है, क्योंकि वह राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता हो सकता है। नीचे कुछ साधारण रणनीति दी गई है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा हित से संबंधित कोई बात नहीं है।

भारतीय नौ सेना तथा भारतीय तट रक्षक के साथ रिश्तों को मजबूत बनानाः-

जी.आर.एस.ई. अपनी अधिग्रहीत योजना से राजस्व उत्पन्न करने के लिए भारतीय नौ सेना तथा भारतीय तट रक्षक के साथ अपने मजबूत रिश्तों को लगातार और मजबूत बनाना जारी रखेगी। इसका उद्देश्य है- भारतीय नौ सेना तथा भारतीय तट रक्षक के जहाजों के बेड़े के आकार को महत्वपूर्ण ढंग से बढ़ाना। अगले दशक के लिए अधिग्रहीत योजनाओं के लिए देश में निर्माण पर उपलब्ध सूचना यह दर्शाती है कि भारतीय नौ सेना एवं भारतीय तट रक्षक  लेंगे- एक देशी एयरक्राफ्ट वाहक, फ्लीट सपोर्ट शिप, फ्रिगेट, माइन काउण्टर मेजर जलयान, तीव्र आक्रामक क्राफ्ट, गश्ती जलयान, नई पीढ़ी के कॉरवेट, सर्वेक्षण जलयान तथा फ्युल बार्ज। जी.आर.एस.ई. अपनी सुविधाओं के क्षमता उपयोग को अधिकतम करने के लिए प्रमुख वेपन वेसल प्लेटफार्म (फ्रिगेट तथा कोर्वेट) के निर्माण हेतु ऑर्डर हासिल करने पर ध्यान देने के लिए इच्छुक है।

भारतीय नौ सेना तथा भारतीय तट रक्षक जलयानों की मरम्मत एवं पुनःफिटिंगः-

आने वाले दशक में तथा उसके आगे भी ठोस बाजार अवसरों का अनुमान लगाया गया है, जो भारतीय नौ सेना तथा भारतीय तट रक्षक के युद्धपोतों को उन्नत बनाने, पुनः फिट करने, रखरखाव व मरम्मत के क्षेत्र में होंगे। अगले 10-15 वर्षों में लगभग 20-25 जलयानों द्वारा अपने बेड़े को और बढ़ाने की तट रक्षक की मंशा पर विचार करते हुए (स्रोतःICRA), भारतीय नौ सेना तथा भारतीय तट रक्षक  द्वारा जलयानों की पुनः फिटिंग्स व मरम्मत पर अधिक फोकस करने की इच्छा है। इतना ही नहीं, मई 2017 में रक्षा मंत्रालय ने डिपीसी के अंश के रूप में भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए “रणनीति भागीदारी” फ्रेमवर्क जारी किया है, जिससे भारतीय शिपयार्डों तथा विदेशी मूल के उपकरण निर्माताओं एवं नैवेल तकनोलॉजी फर्मों के बीच भागीदारी एवं बहु सहयोग की मदद मिलेगी। यह तकनोलॉजी तथा उत्पादन जानकारी की सहभागियों के बीच स्वस्थ विनियम के लिए एक मंच प्रदान करेगा। इस प्रकार की पहल से देश के शिपयार्डों को वैश्विक अवसरों की ओर नज़र डालने में मदद मिलेगी, जिससे आगे चलकर अधिक निर्यात होगा एवं रखरखाव, मरम्मत, रीफिट तथा अपग्रेड के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अवसर मिलेंगे।

तकनीकी सुविधायों तथा क्षमताओं का उन्नयनः-

भारतीय नौ सेना तथा भारतीय तट रक्षक के साथ अपने रिश्ते बनाए रखने के लिए जी.आर.एस.ई. को अपनी तकनीकी क्षमताओं और सुविधाओं में निरंतर सुधार एवं उन्नत बनाना होगा और भावी जहाज निर्माण जरूरतों को पूरा करना होगा। छोटे सामयिकता पर जहाजों के निर्माण से लेकर वृहद तकनीकी क्षमताओं के साथ जहाजों को तैयार करने तक भारतीय नौ सेना तथा भारतीय तट रक्षक को शिप निर्माताओं से कुशलता में निरंतर अभिनव व सुधार चाहिए । वर्ष 2013 में मुख्य कारखाना यूनिट के आधुनिकीकरण के जरिए भारतीय नौ सेना व भारतीय तट रक्षक की भावी जरूरतों को पूरा करने के लिए नींव रखी गई थी। इससे माड्यूलर निर्माण हो सकेगा तथा लागत में कभी और साथ ही साथ शिपनिर्माण समय में कमी आएगी । पुनः वर्ष 2016 में रांची में स्थित इंजन प्लाण्ट को आधुनिक बनाया गया। अगले दो वर्षों में, राजाबागान डॉकयार्ड में शिपनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए वृद्धि की जाएगी। भारतीय नौ सेना व भारतीय तट रक्षक की भावी आवश्कताओं को पूरा करने के लिए अनुसंधान व विकास क्षमताओं में भी निवेश करने की योजना है।

अपनी रणनीति के अंश के रूप में जी.आर.एस.ई. ने निम्नलिखित विकास व विस्तार जारी रखा हैः

  • एफ आप पी नौकाओं के निर्माण हेतु मुख्य कार्य यूनिट तथा 61 पार्क यूनिट में वातावरण संबंधी नियंत्रित समर्पित सुविधाओं का
  • एम.एच.ए. की भावी जरूरतों को पूरा करने के लिए उच्च रफ्तार वाली नौकाओं (25-30 मीटर लम्बी तथा 25-30 नॉट रफ्तार वाली) के लिए नई डिजाइनों का।
  • तटीय सुरक्षा हेतु एम.एच.ए. को 88 फास्ट इण्टरसेप्टो नौकाओं( 12 टन की 58 अदद एवं 5 टन वाली 30 अदद) का निर्माण एवं प्रदाय किया गया।

 

अनुसंधान एवं विकास क्षमताओं में वृद्धिः-

युद्धपोतों की डिजाइन एवं विकास, इंजीनियरिंग उत्पादों के विकास के साथ, को बढ़ाने के प्रयास में अनुसंधान एवं विकास में निवेश करने हेतु राजस्व पूँजी में अधिक प्रतिशत लगाने की योजना है। नया हल (Hull) 65-115 मी. आकार वाले युद्धपोत बनाता है, जिसकी रफ्तार क्षमता 25-35 नॉट तक है, वर्तमान में उसे भी विकसित किया जा रहा है। राष्ट्रीय जलमार्ग पर इनलैण्ड कारगो के संचलन हेतु तथा हल ब्लॉक के परिवर्तन हेतु एक नौका सेतु की डिजाइन एवं विकास के लिए प्रमुख शैक्षणिक संस्थान के साथ भी सहयोग कर रही है। इसके अलावा, 1 जून 2018 को कंपनी के 61 पार्क में सीडीओ में एक डाटा सेण्टर का भी उद्घाटन अभी हाल ही में किया गया है, जिसके पास जटिल सूचना प्रोद्योगिकी प्रचालन के लिए जरूरी मल्टीप्लायर क्षमता है तथा एक सर्वर भी है, जो डिजाइन डाटा की सुरक्षा एवं संरक्षा ऑफर करता है। ग्रीन कंसेप्ट को बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है, जो ऊर्जा संरक्षण में भी योगदान देगा। 7 जुलाई 2018 को 61 पार्क के सीडीओ में एक वर्चुअल रीयलिटी लैब का उद्घाटन किया गया जिससे सी ए डी मॉडल पर निरीक्षण, अत्यंत शुरुआती स्तर पर जटिल विभागों की यूजर समीक्षा तथा भावी शिप डिजाइन का विपणन किया जा सकेगा।

कुछ ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए निम्न ड्राफ्ट (1.7 मी.) के साथ एक नई लैडिंग शिप, हाई प्लेलोड तथा प्रायः 15 नॉट्स की अधिकतम रफ्तार की डिजाइन खासतौर पर बनाई गई। यह डिजाइन अपनी श्रेणी में सबसे बड़ी लैंडिंग शिप यूटिलिटी है और इस डिजाइन को मॉडल टेस्टिंग के जरिए सत्यापित किया गया है।

निम्नलिखित नई कंसेप्ट डिजाइन भारतीय नौ सेना को उनके अनुरोध के तहत जमा दी गई हैः

  • नई पीढ़ी के कॉरवेट
  • सर्वेक्षण जलयान (बड़े)
  • एण्टी सबमेरिन वारफेयर – शैलो वाटर क्राफ्ट

प्रदूषण नियंत्रण जलयान के लिए एक डिजाइन प्रस्ताव भी भारतीय तट रक्षक के पास जमा दिया गया है।

विपणन वातावरण के बदलाव हेतु प्रक्रियाओं को सम्मिलित करनाः-

बदल रहे विपणन वातावरण की जरूरतों को पूरा करने के लिए समायोजन प्रक्रियाओं के समायोजित करने की भी एक योजना बनाई गई है। जहाज निर्माण के लिए प्रतियोगी विपणन स्थल नामांकन प्रक्रिया से निरंतर प्रतियोगी बोली प्रक्रिया की ओर बढ़ रही है। पहले, परियोजनाओं के लिए कंपनियों को नामांकित किया जाता था तथा ठेका हासिल करने के लिए ग्राहकों को बोलियां जमा नहीं करना पड़ती थी। अब, परियोजनाओं के बढ़ते हुए प्रतिशत को प्रतियोगी बोली प्रक्रियाओं के जरिए हासिल किया जाता है। आज, खरीद प्रक्रिया खरीदे जाने वाले पुर्जो की लागत कम करने के लिए बोली प्रक्रिया की ओर अग्रसर है। व्यक्ति में बोली लगाने तथा उचित अवसर की योग्यता होनी चाहिए, जो उसे उचित वित्तीय कार्य निष्पादन बनाए रखने का मौका देता है । परियोजनाओं तथा पुर्जो की खरीद के लिए बोली प्रक्रिया में प्रतिद्वंद्विता करने के लिए कंपनी को सक्षम बनाने के लिए रणनीति विकसित की जा रही हैं। वर्तमान विपणन वातावरण को पूरा करने के लिए अन्य रणनीतियां भी क्रियान्वित की जा रही हैं। इनमें शामिल है- वस्तु सूची नियंत्रण में वृद्धि, रणनीति प्रक्रिया का निर्माण नॉन कोर सेवाएँ व कार्य की आउटसोर्सिग तथा गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं में वृद्धि।

नए बाजार अवसरों की तलाशः-

जी.आर.एस.ई अपने उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार की तलाश करने के लिए तैयार है। वर्ष 2014 में, इसने अपने पहले शिप का निर्यात किया था तथा अब शिपों के निर्यात से अपनी बिक्री को ठोस रूप से बढ़ाना चाहती है। यह विभिन्न भौगोलिक देशों (स्थानों) को निर्यात करने के लिए अपने समस्त आकार के जलयानों का विपणन करने को इच्छुक है। तथापि, वह दक्षिण- पूर्व एशिया, पश्चिमी एशिया, अफ्रीकी देशों तथा लैटिन अमेरिका को छोटे एवं मध्यम आकार के युद्धपोत तथा गश्ती जलयानों का निर्यात करने की उम्मीद करती है, जो इसके निर्यात कारोबार को विकसित करने का अवसर प्रदान करेगा। जी.आर.एस.ई कम पूँजी लागत पर उन्नत क्वालिटी के जलयानों की आपूर्ति करने के लिए तैयार है, जो इसे वैश्विक क्षेत्र में प्रतिद्वंद्विता करने हेतु सक्षम बनाएगा। उपरोक्त रणनीति हासिल करने के लिए यह नवीनतम प्रोद्योगिकी के साथ तालमेल रखते हुए अपने उत्पादों एवं प्रक्रियाओं को उन्नत बनाने की प्रक्रिया में है, ताकि आधुनिक जहाज निर्माण की मांग पूरी की जा सकें।

इसके अन्य उत्पादों की क्षमता वृद्धि के लिए भी प्रयत्न किए जा रहे हैं, जिनमें शामिल हैं, जहाज मरम्मत, डेक मशीनरी, मेरीन पंप, पुल एवं मेरिन इंजन। पुल की डिजाइन का एक नया सिस्टम भी विकसित किया जा रहा है, ताकि नए बाजारों में प्रवेश के लिए क्षमता बढ़ाई जा सके, वर्तमान बाजार को सुदृढ़ बनाया जा सके, इंजनों की उत्पादन कुशलता के लिए आधुनिक सुविधाओँ तथा पुलों के लिए डीईपी में अतिरिक्त उत्पादन सुविधाएं स्थापित की जा सके।

बिजनेश वर्टिकल्सः-

जी.आर.एस.ई. निम्नलिखित कोर वर्टिकल्स में उत्पाद ऑफर करती हैः-

  • पोत निर्माण
  • इंजीनियरिंग
  • इंजन उत्पादन

पोत निर्माण डिविजन रक्षा क्षेत्र के जहाजरानी उद्योग से जुड़े ग्राहकों के लिए जलयानों के निर्माण से संबद्ध है। इन जलयानों में शामिल है – फ्रिगेट, एण्टी-सबमेरीन वारफेयर कॉरवेट्स, लैंडिंग शिप टैंक, लैंडिग क्राफ्ट यूटिलिटी, सर्वेक्षण वैसल, फ्लीट रिप्लीनीशमेण्ट, टैंकर, तीव्र गश्ती जलयान, ऑफशोर गश्ती जलयान इनशोर पैट्रोल वैसल, WJ-FAC हॉवर क्राफ्ट तथा फास्ट इण्टरसेप्टर बोट। इंजीनियरिंग डिविजन इनका निर्माण एवं विकास करता है- पोर्टेबल स्टील पुल, संस्पेंशन तरह का पूर्व फैब्रिकेट किया हुआ स्टील पुल, मेरीन पंप रेल – लेस हेलिकॉफ्टर ट्रांवर्सिंग सिस्टम, बोट डैविट, ऐंकर, मूरिंग एवं डॉक – कैप्टन, ऐंकर विण्डलॉस एवं विंचेज शामिल है।

इंजन उत्पादन डिविजन राजस्व के मामले में सबसे छोटा डिविजन है। यह असेम्बली टेस्टिंग डीजल इंजन के विभिन्न माडलों की सर्विसिंग एवं मरम्मत जिनका प्रयोग मेरीन प्रपल्सन  तथा बिजली उत्पादन जर्मनी के एम.जी.यू के साथ सहयोग के जरिए किया जाता है। इंजन डिविजन के जरिए एम.टी.यू. 396-04, 4000, 1163, 538 तथा 183 श्रृंखला वाले डीजल इंजनों, इंजन के पुर्जों तथा उपस्करों का उत्पादन किया जाता है। जी.आर.एस.ई. ने हाल ही में भारत में एक इंजन उत्पादन कंपनी के साथ समझौता ज्ञापन में प्रवेश किया है- छोटे एवं मध्यम क्षमता वाले (50-500 Kw) इंजनों का उत्पादन करने के लिए।

जी.आर.एस.ई. के उत्पादों का अधिकांश आपूर्ति केन्द्र एवं राज्य सरकारों तथा उनके नियंत्रण व स्वामित्व वाले संगठनों को की जाती है। राजस्व का महत्वपूर्ण अधिकांश अंश जहाज निर्माण उत्पादों की भारतीय नौ सेना तथा भारतीय तट रक्षक को बिक्री के प्राप्त होता है।

मार्च, 2018 में, जी.आर.एस.ई. ने बेली प्रकार के पोर्टेबल स्टील पुलों से संबंधित सेवा एवं उपकरणों, पुर्जों की आपूर्ति के लिए आपसी हित के लिए सहयोग तथा इसके निर्यात व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए भारत से बाहर एक संस्था के साथ समझौता – ज्ञापन में प्रवेश किया है। अप्रैल- 2018 में, एस अनाम सर्फेश वैसल के देश में उत्पादन हेतु सर्वश्री अलबिट सिस्टम्स लिमिटेड, इजराइल के साथ और मई 2018 में एक जहाज निर्माण परियोजना के लिए एक कोलैबोरेशन बनाने हेतु अन्य क्षेत्र के रक्षा मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

 

उत्पादः-

पोत निर्माण उत्पादः

Brief descriptions of our shipbuilding products are specified below:

  • फ्रिगेट

3650 टन वाले फ्रिगेट की डिजाइन एवं निर्माण देश में ही किया गया। तीन पी-16 ए ब्रह्मपुत्र श्रेणी के फ्रिगेटों की आपूर्ति भारतीय नौ सेना को को गई, जिनके नाम थे- आई.एन.एस. ब्रह्मपुत्र, आई.एन.एस. बेतवा तथा आई.एन.एस. बियास।

  • ए.एस.डब्ल्यु कोर्वेट -

ए.एस.डब्ल्यु (एण्टी सबमेरीन वारफेयर) कोर्वेटों की डिजाइन देश में बनाई गई, जिसमें लगभग 90% देशी वस्तु तथा 3250 टन का टनेज था। भारतीय नौ सेना को इस तरह के तीन ए.एस.डब्ल्यु कॉरवेटों की डिलिवरी की गयी। पी-28 श्रेणी वाले कॉरवेट में है- आई.एन.एस. कमोर्टा, आई.एन.एस. कदमत तथा आई.एन.एस. किलटान। अक्तूबर 2017 में आई.एन.एस. किलटान की डिलिवरी भारतीय नौ सेना को की गई, जो कि पहला युद्धपोत है, जिसमें कंपोजिट मटेरियल से पूर्व रूप से निर्मित सुपर स्ट्रकचर है।

  • मिसाइल कोर्वेट -

मिसाइल कोर्वेट की डिजाइन देश में बनाई गई है, जिसमें 1370 टन का टनेज होता है। पाँच P-25 और P-25A श्रेणी वाले मिसाइल कॉरवेट की डिलिवरी भारतीय नौ सेना को की गई है, जिनके नाम है- आई.एन.एस. खंजर, आई.एन.एस. कोटा, आई.एन.एस. कुलिश तथा आई.एन.एस. कारमुक ।

  • लैडिंग शिप टैंकः-

लैडिंग शिप टैंक की डिजाइन देश में बनाई गई है, जिसमें 5650 टन का टनेज होता है। यह एक व्हीकल और ट्रप बाहक होता है, जो 40 या स्टीपर में 1 के बीज ग्रैडियण्ट पर बीचिंग करने में सक्षम है। 5 बड़े शिप टैंकों की आपूर्ति भारतीय नौ सेना को की गई है, जिनके नाम है- आई.एन.एस. मगर, आई.एन.एस. घड़ियाल, आई.एन.एस.शार्दूल, आई.एन.एस. केशरी एवं ऐरावत ।

  • लैडिंग क्राफ्ट यूटिलिटीः-

लैडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी जलयानों का इस्तेमाल शिप से तट तक तथा तट से शिप तक सैनिकों व उपकरणों के परिवहन डिप्लाय एवं रिकवर करने के लिए किया जाता है। जी.आर.एस.ई. की लैडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी की डिजाइन देश में बनाई जाती है, जिसमें 90% से अधिक देशी सोजोसमान होते है, तथा 910 टन का टनेज होता है। वर्तमान में, भारतीय नौ सेना से 8 लैडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी के लिए ऑर्डर मौजूद है, जिनमें से चार (L-51, L-53, L-53 एवं L-54) की डिलिवरी की जा चुकी है और शेष निर्माण के विभिन्न स्तरों पर निर्माणाधीन है।

  • सर्वेक्षण जलयानः-

सर्वेक्षण जलयान की डिजाइन देश में बनाई जाती है, जिसमें 1929 टन  का टनेज होता है। सर्वेक्षण जलयान सभी प्रकार के समुद्री अनुसंधान और हाइड्रोलिक सर्वेक्षण करने में सक्षम है। ये जलयान मुख्य हाइड्रोग्राफर भारतीय नौ सेना के साथ सेवा में रहे हैं तथा पश्चिम एशिया में विदेशी कार्यों को क्रियान्वित किया है। छः सर्वेक्षण जलयानों की आपूर्ति भारतीय नौ सेना को की गई है, जिनके नाम है, आई.एन.एस. संधायक, आई.एन.एस. निर्देशक, आई.एन.एस. निरुपक, आई.एन.एस. इंवेस्टीगेटर, आई.एन.एस. यमुना तथा आई.एन.एस. सतलज।

  • फ्लीट रिप्लेनिसमेण्ट टैंकरः-

जी.आर.एस.ई. के फ्लीट रिप्लेनिसमेण्ट टैंकर की डिजाइन एक जर्मन कंपनी द्वारा बनाई गयी थी, 24600 टन के टनेज के साथ। इसका प्रयोग समुद्र में युद्धपोतों में ईंधन भराई के लिए किया जाता है। इसके साथ ही अस्त्र-शस्त्र, ताजा जल, आवश्यक सामग्री, अस्पताल संबंधी सुविधाओं एवं अन्य जरूरी आईटमों को प्रदान करने कि लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है। एक फ्लीट भरई टैंकर की आपूर्ति भारतीय नौ सेना को की गयी है, जिनका नाम है- आई.एन.एम. आदित्य।

  • ऑफशोर गश्ती जलयानः-

ऑफशोर गश्ती जलयान की डिजाइन देश में तैयार की जाती है तथा बहु-उद्देशीय भूमिका अदा करने में सक्षम है। इनका प्रयोग भारतीय सुरक्षा बल द्वारा एण्टी – पायेरसी ऑपरेशंस, खोजबीन एवं राहत कार्यों एण्टी तस्करी और एण्टी – ड्रग सर्विलेंस तथा विशेष आर्थिक जोनों के एण्टी पोचिंग ऑपरेशन- मत्स्य पालन सुरक्षा एवं लॉजिस्टिक सपोर्ट ऑपरेशन सहित- के लिए भी किया जाता है। ऑफशोर गश्ती जलयान का इस्तेमाल सूखे कार्गो, ईंधन तेल, ताजा जल, रेफ्रिजरेट किए गए ताजा भोज्य पदार्थों सैनिकों / कार्मिकों की छोटी अलग हुई टुकड़ी के परिवहन हेलीकॉप्टर ऑपरेशन, प्रदुषण प्रतिसाद ऑपरेशन तथा वाह्य अग्निशमन के लिए भी किया जाता है। वर्ष 2011 में, जी.आर.एस.ई. पहला शिपयार्ड था, जिसे मारीशश सरकार स्ेऑफशोर गश्ती जलयान निर्माण के लिए युद्धपोत के लिए निर्यात ऑर्डर प्राप्त हुआ था। 20 दिसंबर 2014 को यह पहली भारतीय कंपनी बन गई, जिसने मारीशस के राष्ट्रीय तट रक्षक को सी.जी.एस. बाराकुडा का निर्माण एवं निर्यात किया था।

  • इनशोर गश्ती जलयान तथा तीव्र गश्ती जलयानः-

इनशोर गश्ती जलयान तथा तीव्र गश्ती जलयान की डिजाइन देश में तैयार की जाती है, जिसमें 280-304 टन का टनेज होता है। यह एक लागत बचतकारी प्लेटफार्म है, जो मेरीन सर्विलेंस तथा बचाव (राहत) कार्य के लिए उपयुक्त है। ये जलयान अपने इस्तेमालकर्ता को युद्ध के लिए हथियारों से लैस करने की सुविधा देता है तथा तेज चलने वाले सतही क्राफ्ट का अंतरावरोधन के लिए उपयुक्त है। यह तस्करी विरोधी, मत्स्य सुरक्षा तथा खोजबीन एवं राहत कार्य भी करता है। 8 इनशोर गश्ती जलयान तथा  17 तीव्र गश्ती जलयान की डिलिवरी भारतीय तट रक्षक को की गयी। इसके अलावा जी.आर.एस.ई. ने नौ सेना को 20 गश्ती जलयान भी प्रदान किए।

  • वाटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट (WJFAC)

WJFAC की डिजाइन देश में ही तैयार की जाती है- 288 टन के टनेज के साथ। यह फुर्ती और रफ्तार के पावर हाउस पंच की पैकिंग के द्वारा नैवेल ऑफशोर ऑपरेशन के कायाकल्प के प्रति कृतसंकल्प है। ये शिप क्राफ्टों की जटिल जरूरतों को नेटवर्किंग क्षमता में उन्नत गोपनीयता के साथ पूरा करते है। ये WJFAC तेज चलने वाले सतही क्राफ्टों के लिए अन्तरोधन के लिए आदर्श एवं उपयुक्त है तथा तस्करी विरोधी, मत्स्य सुरक्षा तथा खोजबीन व राहत कार्य भी ये करते है। भारतीय नौ सेना को 14 WJFAC की डिलिवरी की जा चुकी है।

  • हॉवर क्राफ्ट-

हॉवर क्राफ्ट जल एवं थल दोनों पर कार्य करने के लिए उपयुक्त है। भारतीय तट रक्षक को 6 हॉवर क्राफ्ट की डिलिवरी की जा चुकी है, जिसके पहले दो हॉवर क्राफ्ट का आयात यूके से पूरी तरह से असेम्बल की गई स्थिति में किया गया था। शेष 4 हॉवर क्राफ्ट का आयात पूरी तरह से नॉकडाउन किट्स में किया गया था और जी.आर.एस.ई. ने उनको असेम्बल किया था। भारतीय बाजारों में हॉवर क्राफ्टों की अपर्याप्त मांग के कारण देश में हॉवर क्राफ्ट निर्माण का प्रयास और आगे न करने का निर्णय लिया गया । तथापि, इन हॉवर क्राफ्टों की मरम्मत तथा रखरखाव के लिए भारतीय तट रक्षक को निरंतर सहायता दी जाती रही है (वार्षिक रखरखाव करार के जरिए) ताकि उन्हें चालू रखा जा सके ।

  • तीव्र अन्तररोधक बोट-

तीव्र अन्तररोधक बोटों की डिजाइन देश में तैयार की जाती है, जिसमें 5 टन और 12 टन का टनेज होता है। इनका इस्तेमाल दिन/रात निगरानी सह तहकीकात वैसल के रूप में किया जा सकता है, जो तटीय पॉलिशिंग, तस्करी विरोधी, मत्स्य संरक्षण एवं खोजबीन व राहत कार्यों के लिए छिछले जल में काम करता है। 88 तीव्र अन्तररोधक बोट (12 टन वाले 58 अदद और 5 टन वाले 30 अदद) का निर्माण किया गया और तटीय सुरक्षा के लिए भारत सरकार के गृह मंत्रालय को प्रदान किए गए।

उपरोक्त जहाज निर्माण उत्पादों के अतिरिक्त तरह – तरह के बोटों पण्टूनों, बार्जों सेलिंग डिघीज, फिसिंग ट्रालर्स, फायर फ्लोटों, टग्सों, डेजरों, यात्री फेरीजों, मोटर कटरों, डेक व्हालरों, लांचों आदि की आपूर्ति वर्षों तक विभिन्न ग्राहकों को की गई।

इंजीनियरिंगः-

वर्ष 1970 में इंजीनियरिंग डिविजनों की स्थापना की गयी थी, शुरुआती दौर में आधुनिक डेक मशीनरी  आइटमों का देशीकरण करने के लिए। आज, यह डिविजन पोर्टेबल पुलों, डेक मशीनरी आइटमों एवं मेरीन पंपों का उत्पादन करता है।

  • पोर्टेबल पुलों-

पोर्टेबल पुलों की डिजाइन इस तरह की जाती है, जो फासले (गैप) के एक तरफ से रोलरों पर पूरी तरह से इटेक्ट करने के लिए पुल को अनुमति दे तथा फिर गैप में बिना कोई सपोर्ट का प्रयोग किए दूसरी ओर लांच किया जाता है। इसका खास प्रयोग फार - फ्लांग क्षेत्रों तथा पहाड़ी भू – भाग में पहुँचना आसान बनाने के लिए किया जाता है एवं जहां पर प्राकृतिक आपदा द्वारा  मौजूदा सड़क अथवा पुल की संयुक्तता को नष्ट कर दिया गया है, वहां संचार व आवागमन को शीघ्र बहाल करने कि लिए भी किया जाता है। विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों जैसे मुश्किल भू- भाग बाले सुदूर लोकेशनों को जोड़ने में सड़क नेटवर्क को भी पोर्टेबल पुल बढ़ाते है- उदाहरण के लिए देश के पूर्वोत्तर भाग में हाइड्रो सेक्टर में स्वतंत्र बिजली उत्पादकों द्वारा परियोजनाओं की शुरुआत के लिए । इस उत्पाद के जरिए बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, म्यनमार, आदि देशों में निर्यांत संभावनाओं को बढ़ावा देना भी इसकी मंशा है।

 

पोर्टेबल पुलों के पोर्टफोलियों में शामिल हैः-

  • मानक चौड़ाई (3.32 मी) सिंगल लेन पुल
  • अधिक चौड़ा (4.25 मी) सिंगल लेन पुल (स्टील डेक)
  • अधिक चौड़ा (4.25 मी) उन्नत सिंगल लेन पुल 10’ X7’ पैनेल का इस्तेमाल करते हुए।
  • डबल लेन पुल (स्टील डेक) 10’ X7’ पैनेल सहित
  • ससपेंशन पुल

 

पोर्टेबल पुल वैश्विक AASHTO (अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ स्टेट हाईवे ट्रांसपोर्टेशन ऑफिसियल) मानक को पूरा करते हैं तथा हॉट डिप गैल्वनाइज्ड स्थिति में आपूर्ति किए जाते हैं। ओड़िशा सरकार, छतीसगढ़ सरकार तथा सीमा सड़क संगठन की हिमांक परियोजना को गैल्वनाइज्ड पोर्टेबल स्टील पुलों की आपूर्ति के लिए समझौता ज्ञापन मौजूद है। क्षमता की बात करें, तो जी.आर.एस.ई. के पास लगभग 60 % मार्केट शेयर है तथा वित्त वर्ष 2017 में लगभग 4,800 में.टन का उत्पादन किया था। ऑर्डर के अनुसार पुलों का निर्माण किया जाता है, क्योंकि पुलों का आकार – प्रकार पुलों की चौड़ाई तथा पुलों की भार  वहन  क्षमता के अनुसार भिन्न – भिन्न होता है। मुख्य रूप से स्टील के प्रयोग से बने पुल को मौके पर असेम्बल किया जाता है और इसीलिए इसे पोर्टेबल पुल कहा जाता है।

सिंगल लेन पुलों के लिए स्टील डेक सिस्टम को कठोर बनाने तथा डबल लेन पोर्टेबल स्टील के पुलों को तैयार करने का पेटेण्ट जी.आर.एस.ई. के पास है, जिसे क्रमशः वर्ष 2011 तता 2007 में प्राप्त किया गया था। इतना ही नहीं काम चलाऊ सिंगल लेन स्टील ब्रिज सिस्टम तथा काम चलाऊ स्टील डेकिंग सिस्टम से संबंधित 2 और पेटेण्ट आवेदन प्रमाणीकरण के लिए प्रक्रियाधीन हैं। इस यूनिट में है – एक इन- हाउस डिजाइन विभाग जो संभावित ग्राहकों की परिवर्तनशील जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने उत्पादों के निरन्तर उन्नयन से जुड़ा हुआ है। वर्तमान में, यह एसाल्ट पुलों, सस्पेंशन पुलों के लिए केबल गियर एवं पोर्टेबल स्टील पुलों के लिए वाक वे अटैचमेण्ट विकसित करने के लिए काम कर रहा है। पोर्टेबल पुलों के उत्पादों के लिए बढ़ती हुई मांग को पूरा करने कि लिए DEP में अतिरिक्त उत्पादन सुविधाएं विकसित की गई है, जिसके  चालू वित्त वर्ष में 10 पुलों की आपूर्ति करने की आशा है। जी.आर.एस.ई. कदाचित दुनिया में सर्वोच्च मॉड्युलर स्टील पुल का उत्पादन करती है, जिसकी स्थापना जम्मू एण्ड कश्मीर के खारडंग – ला, लद्दाख में की गई है। इसे बॉर्डर रोड आर्गनाइजेशन द्वारा 5,602 मीटर की ऊँचाई पर इरेक्ट किया गया था तथा वर्ष 1990 में ग़िनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में सूचीबद्ध किया गया था ।

 

डेक मशीनरी मद -

जी.आर.एस.ई. इलेक्ट्रो हाइड्रोलिक तथा  इलेक्ट्रिक डेक मशीनरी उपकरण दोनों को विकसित, डिजाइन, उत्पादन एवं आपूर्ति करती है, जो विभिन्न श्रेणी की जरूरतों को पूरा करते है। इंजीनियरिंग डिविजन ने नौ सेना के वैसेल्स के बोर्ड पर हेलीकाप्टर की हाउजिंग के लिए एक टेलेस्कोपिक हेलीकाप्टर हैंगर का उत्पादन भारत में पहली बार किया है, जिसे सर्वप्रथम आई.एन.एस. इनवेस्टीगेटर पर लगाया गया था। डेक मशीनरी आइटम के उत्पादन श्रृंखला में शामिल है- विण्डलॉस । ऐंकर कैप्सटन, डॉक कैप्सटन, डेकक्रेन, बोट डेविट्स, स्पेशल परपज विंचेग स्टीयरिंग गेयर, इलेक्ट्रो हाइड्रोलिक  डेक क्रेन तथा अत्याधुनिक उत्पाद जैसे पुट्टीरहित तथा पटरी आधारित हेले ट्रावर्सिंग सिस्टम जिसकी डिजाइन और निर्माण अलग – अलग वैसलों को सहयोग देने के लिए ग्राहको की खास जरूरतों के पूरा करने के लिए किया जाता है। भारतीय नौ सेना, भारतीय तट रक्षक, सार्वजनिक व निजी शिपयार्डों तथा जी.आर.एस.ई. के अपने जहाज निर्माण डिविजन के लिए भी डॉक मशीनरी आइटमों का उत्पादन किया जाता है।

 

मेरीन पंपः-

इंजीनियरिंग डिविजन का मेरीन पंप उत्पाद देशी सेण्ट्रीफ्युगल पंपो को विकसित करने का कार्य हाथ में लिया था, ताकि रूस मूल के पंपों का स्थान यह ले सके। इन पंपों की डिजाइन अपने यहां बनाई जाती है, और डिजाइन की पड़ताल तथा सत्यापन सोसाइटी ऑफ टर्बो मशीनरी द्वारा SNF/SNM प्रकार के नौ सेना के शिपों तथा EKM प्रकार के भारतीय नौ सेना की पनडुब्बियों के लिए किया जाता है, जिसे ईस्टर्न नेवल कमाण्ड द्वारा प्रमाणित किया जाता है। देशीकरण की प्रक्रिया पूरा होने के बाद, भारतीय नौ सेना को कुल 155 मेरीन पंपो की आपूर्ति की गई- 31 जुलाई, 2018 तक । भारतीय नौ सेना की विभिन्न प्रकार के पंपों की भी आपूर्ति ऑन बोर्ड नैवल शिपों पर विभिन्न पंपों की बदली / रिकार्बिस करने के लिए की जाती है, और अभी तक 10 (दस) प्रकार के पंप विकसित व डिलिवरी की गयी, जिसे देशीकरण एवं विकास के लिए हाथ में लिया गया था। पंपों के विभिन्न मॉडलों का उपयोग पंपों के भिन्न – भिन्न रेंजो की आपूर्ति के लिए किया जाता है, आवश्यकतानुसार आपरेटिंग पैरामीटरों पर उपयुक्त सुधार करके ।

सभी मेरीन पंप नॉन फेरस कंपोनेण्ट (“NAB”) बनाए जाते है, जिसमें विशेष प्रकार की कास्टिंग की जरूरत पड़ती है, NES 747, BS 1400 के अनुसार तथा कास्टिंग को आउट-सोर्सिंग के जरिए करवाया जाता है। पंप के सभी पुर्जो की मशीनरी इन हाउस / आउट-सोर्सिंग सुविधाओँ के जरिए किया जा रहा है, जो ऑर्डर की अविलम्बिता पर निर्भर करता है। खरीदे गए आइटम जैसे मोटर, कंट्रोल पैनेल एवं मेकनिकल सील आदि की खरीद आउट-सोर्सिंग के जरिए की जाती है। पंपों की असेम्बली मौजुदा ऑर्डरों को पूरा करने के लिए इन- हाउस की जाती है। तारातला यूनिट में एक आधुनिक टेस्ट बड़े इरेक्शन के अधीन है।

 

इंजन उत्पादनः-

MTU 396-04 MTU 4000, MTU 1163 तथा एम.टी.यू (MTU) 538 श्रेणियों वाले डीज़ल इंजनों की आपूर्ति और ओवर हालिंग डी.ई.पी. के इंजन उत्पादन डिविजन द्वारा की जाती है। डी.ई.पी.में मेरीन इंजन यूनिट के लिए असेम्बली तथा परीक्षण सुविधाओं को हाल ही में आधुनिक बनाया गया है, जिसपर लगभग ` 100 मिलियन का निवेश किया गया है। इसके फलस्वरुप MTU 4000, MTU 538 तथा MTU 396 श्रृंखला वाले इंजनों की W6 रूटिन के लिए MTU (इंडिया) के साथ सेवा भागीदारी करार पर हस्ताक्षर किए गए है। जी.आर.एस.ई. के पास MTU 12V/16V 4000 M90 इंजनों के सेमी नॉक्ड – डाउन स्थिति में असेम्बली तथा इंजनों के पुर्जों के उत्पादन के लिए MTU जर्मनी के साथ एक लाइसेंस करार भी है।

डी.ई.पी. के लिए जी.आर.एस.ई. ने नैवेल वैसलों के लिए हाई-स्पीड तथा हाई- पावर – टू- वेटरेसिओं डिज़ल इंजनों के उत्पादन हेतु MTU के साथ प्रौद्योगिकी अंतरण एवं लाइसेंसिंग के लिए कई व्यवस्थाओं में प्रवेश किया है। MTU के सहयोग से, 149 विभिन्न समाकृतियों वाले इंजनों की आपूर्ति मेरीन कार्यों के लिए की गयी थी। विभिन्न श्रृंखला वाले 81 से अधिक इंजनों की मरम्मत एवं ओवरहॉलिंग भी की गयी थी। इतना ही नहीं कंपनी अगले 4-5 वर्षों में इंजन पुर्जों का लगभग 60% देशीकरण की प्रक्रिया में “मेक इन इंडिया कार्यक्रम के अधीन है।

वर्ष 2017 में, मेरीन कार्यो के लिए इंजनों के विकास के लिए एक इंजन निर्माता के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। सहयोग का अवसर भारतीय नौ सेना, भारतीय तट रक्षक, इनलैण्ड वाटरवेज, बोट्स ऑफ MHA आदि वैसलों के लिए 50-500 किवा. श्रृंखला में मेरीन कार्यों के लिए डीज़ल विकल्पों हेतु डीज़ल इंजन उत्पादन के लिए था,  जिसका लक्ष्य आत्म निर्भरता एवं “मेक इन इंडिया पहल के बढ़ावा देने की दिशा में था। जी.आर.एस.ई. इंजनों में अधिकांश की आपूर्ति भारतीय नौ सेना व भारतीय तट रक्षक के आपूर्ति की जाती है।

 

ऑर्डर बुकः-

ऑर्डर बुक को वर्तमान करारों के अधूरे अंश से किसी निश्चित तारीख को प्राप्त होने वाले राजस्व के रूप में पारिभाषित किया जाता है। 31 जुलाई 2018 को रु. 203,136.10 मिलियन का ऑर्डर बुक था, जिसमें शामिल था उत्पादित एवं आपूर्ति किए जाने वाले उत्पाद । 31 दिसंबर, 2018 को 13 शिपों के निर्माण एवं डिलिवरी के लिए निश्चित करार थे, जिसमें शामिल थेः-

  • 1 एएसडबल्यू कोर्वेट
  • 3 लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी
  • 5 तीव्र गश्ती जलयान
  • 3 P-17-A श्रेणी के फ्रिगेट
  • 4 सर्वेक्षण वैसल (बड़े)

इसके अलावा DEP ने 2,250.00 मिलियन मूल्य के 28 डिज़ल आल्टरनेट के लिए ऑर्डर प्राप्त किए हैं।

सुविधाएं -

तीन कोर डिविजनों में से प्रत्येक के लिए अलग – अलग फेसिलिटी हैं। ये डिव़िजन हैं- पोतनिर्माण, इंजीनियरिंग एवं इंजन उत्पादन । एक तकनीकी प्रशिक्षण फेसिलिटी भी है।

पोतनिर्माण सुविधा -

तीन कोर पोतनिर्माण सुविधा मौजूद हैः

  • मेन वर्क्स यूनिट
  • राजा बागान डॉकयार्ड
  • एफ.ओ.जे. यूनिट

मेन वर्क्स यूनिट सबसे बड़ी फेसिलिटी है ।

 

मेन वर्क्स (MAIN WORKS):-

मेन वर्क्स में शामिल है एक एकीकृत शिपनिर्माण फेसिलिटी, जो कोलकाता ( भारत) में 48 एकड़ जमीन पर फैला हुआ है, जिसमें शामिल हैः-

  • एक अदद ड्राई डाँक जिसका माप है 180X29X10 मीटर, जिसमें है 10,000 डी. डब्लु.टी लांचिग क्षमता
  • एक झुका हुआ बर्थ, जिसका माप है 180X23 मीटर जिसमें है 4510 डी.डब्लु.टी. लांचिग क्षमता
  • ड्राई डॉक तथा झुके हुए बर्थ के ऊपर पोर्टेबल शेल्टर
  • 200 टन तक बड़ा प्री-आउटफिटेड ब्लॉक के निर्माण हेतु मॉड्युल हॉल
  • ब्लास्ट एवं पेण्ट सेलॉ
  • 2 अतिरिक्त रिवर जेट्टी
  • सेण्ट्रल पियर, एमिनिटी ब्लॉक, पेवमेण्ट तथा अन्य आइटम ।

 

मेन वर्क्स में अन्य मौजूद ढ़ाचों में शामिल हैः-

  • वेट बेसिन तथा ड्राई डॉक
  • 80X25X8 मीटर पूरी तरह से आच्छादित नॉन-टाइडलवेट बेसिन, 2X10 टन ई.ओ.टी क्रेन के साथ, जो सभी मौसम में मध्यम एवं छोटे शिपों की फिटिंग-आउट के लिए उपयुक्त ।
  • 160X25X8 मीटर ड्राई डॉक, 2X10 टन गोलिआथ क्रेन के साथ, जो शिपों के मरम्मत तथा निर्माण के लिए उपयुक्त है।
  • बिल्डिंग बर्थ
  • माप 180X25 मीटर
  • 2X40 / 10 टन क्रेनों से सुसज्जित तथा सहयोगी फ्रेबिकेशन शॉप
  • रिवर जेट्टी
  • 2 रिवर जेट्टी जो 60 मीटर लम्वाई तक के बर्थ वैसल के योग्य
  • छोटे जलयानों की मरम्मत / फिटिंग आउट के लिए उपयुक्त
  • अतिरिक्त फेसिलिटी – फास्ट इण्टरसेप्टर बोट के उत्पादन हेतु बोट शेड ।
  • दो वातानुकूलित तथा नमी नियंत्रित शॉप, 6 वे सहित लम्बाई में 18-40 मीटर तक ।
  • 20 मीटर तक क्राफ्ट निर्माण में सक्षम ।

राजा बागान डॉकयार्डः-

राजा बागान डॉकयार्ड 31.15 एक़ड़ पर फैला हुआ है जो, कोलकाता, भारत अवस्थित है, जिसमें 550 मीटर खुला नदी फ्रण्ट है और 50 मीटर वाले 3 शिपों की प्री लांच गतिविधियों एवं एक साथ चार शिपों के लिए लांच के बाद आउटफिटिंग्स के लिए सक्षम है। राजाबागान डॉकयार्ड 4 मी. तक ड्राफ्ट फेसिलिटी रखने वाले शिपों को स्थान दे सकता है।

एफओजे यूनिटः- फिटिंग आउट जेट्टी यूनिट (FOJ UNIT) कोलकाता (भारत) में 18 एक़ड़ जमीन पर कब्जा किए हुए है, जो शिपों की मरम्मत एवं फिटिंग आउट को समर्पित है। एफओजे यूनिट में शामिल सुविधाएं हैः-

  • नैवेल कंप्लेक्स जेट्टी (229X10X8 मी.) एक 25 टन टावल क्रेन के साथ
  • फिंगर जेट्टी (18450X143X7 मी., 15 टन लेवल लिफ्टिंग क्रेन सहित)

यूनिट छोटे, मध्यम व बड़े शिपों को फिटिंग के लिए उपयुक्त है- यद्यपि प्रारंभिक तौर पर यह बड़े शिपों के लिए है। यह एक साथ चार बड़े शिपों तक फिटिंग आउट के लिए सक्षम है।

इंजीनियरिंग फेसिलिटीः-

61 पार्क यूनिट: 61 पार्क यूनिट पोर्टेबल स्टील पुलों के उत्पादन के लिए प्राथमिक यूनिट है और कोलकाता (भारत) में 11.07 एकड़ जमीन पर अवस्थित है। इसमें शिप डिजाइन कार्यालय, कॉर्पोरेट प्लानिंग एवं वाणिज्यिक अनुभाग भी हैं।

तारातला यूनिट

डेक मशीनरी आइटमों का उत्पादन तारातला यूनिट में किया जाता है, जिसने कोलकाता (भारत) में 3.39 एकड़ जमीन पर कब्जा जमा रखा है। तारातला यूनिट हर तरह के डेक मशीनरी उपकरण तथा नैवल पंपों का उत्पादन, असेम्‍बली, जांच एवं परीक्षण से जुड़ा हुआ है। डेक मशीनरी यूनिट वर्तमान में भारतीय नौ सेना तथा भारतीय तट रक्षक के बड़े शिपों के लिए पटरी-विहीन हेलो ट्रावसिंग सिस्टम की आपूर्ति करती है। हाल में 11 जून 2018 को उत्पादित पंपों के परीक्षण के लिए तारातला यूनिट में आधुनिक पंप टेस्ट बड़े फेसिलिटी का उद्घाटन किया गया।

इंजन उत्पादन फेसिलिटीः-

डीजल इंजन प्लाण्ट, रांची (डी.ई.पी.)

डी.ई.पी. 62 एकड़ जमीन पर फैला हुआ है तथा रांची, झारखणड में स्थित है। इस लोकेशन में मेरीन इंजनों को असेम्बल, परीक्षण और ओवरहालिंग किया जाता है।

डी.ई.पी. के अतिरिक्त मुख्य ओवरहाल (W6 रूटीन तक) एम.टी.यू 396,4000 एवं 538 सिरीज वाले इंजनों के लिए भी फेसिलिटी उपलब्ध है।

मई, 2016 के दौरान, डी.ई.पी., रांची में पोर्टेबल स्टील पुलों के लिए अतिरिक्त उत्पादन फेसिलिटी की भी स्थापना की गयी।

 

प्रशिक्षण फेसिलिटीः-

तकनीकी प्रशिक्षण केन्द्र (TTC) बारानगर, कोलकाता में लगभग 2.05 एक़ड़ जमीन पर अवस्थित है। TTC एक आई.एस.ओ. 9001: 2008 प्रमाणित प्रशिक्षण संस्थान है तथा डाइरेक्ट्रेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS), सरकार अनुमोदित 12 महीने का प्री-सी मेरीन इंजीनियरिंग प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का आयोजन मेकेनिकल तथा नैवल आर्किटेक्ट इंजिनियरिंग ग्रेज्यूएट के लिए करता है जिसकी वार्षिक इनटेक क्षमता है 100 कैडेट। TTC जी.आर.एस.ई. के कर्मचारियों - वेल्डिंग फिटिंग, पाइप फिटिंग इलेक्ट्रिकल एवं मशीनिस्ट ट्रेड में अप्रेंटिसों के लिए विभिन्न प्रकार के तकनीकी एवं कौशल विकास प्रशिक्षण भी आयोजित करता है।

सहयोगः-

जी.आर.एस.ई. वर्तमान में MTU 396-04, 4000, 1163 538 तथा 183 श्रृंखला वाले डीजल इंजनों के उत्पादन हेतु MTU के साथ सहयोग करता है। वर्ष 2016 में, 9 इंजीनियरिंग – रेल रहित हेलो ड्रावर्सिंग सिस्टम की डिलिवरी की गयी थी, जिसकी डिजाइन एक अंतर्राष्‍ट्रीय संस्था के सहयोग से तैयार की गयी थी, जिसके पास संबंधित विशेषज्ञता थी।

अक्तूबर 2017 में, जी.आर.एस.ई. ने एक इंजन उत्पादक के साथ मेरीन उपयोग के लिए इंजन विकसित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन में प्रवेश किया था। डीजल के विकल्पों के लिए डीजल इंजन का उत्पादन करने के लिए सहयोग का अवसर है, जो भारतीय नौ सेना व भारतीय तट रक्षक वैसलों के लिए मेरीन प्रयोज्य के लिए प्रयोग किया जाएगा, जो 50-500 KW श्रृंखला में होगा और जिसका लक्ष्य आत्मनिर्भरता तथा “मेक इन इण्डिया” पहलों को बढ़ावा देना है।

मार्च 2018 में, निर्यात व्यवस्था को बढ़ावा देने और आपसी हितों पर सहयोग देने तथा बेली टाइप के पोर्टेबल स्टील पुलों से संबंधित पुर्जों, उपकरणों एवं सेवाओं की आपूर्ति करने के लिए भारत से बाहर एक संस्था के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। अप्रैल, 2018 में, मानवरहित सतही जलयान के देशी उत्पादनों हेतु एलबिट सिस्टम लि. के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए तथा मई 2018 में, शिपनिर्माण परियोजनाओं के लिए अन्य अधिकार क्षेत्र के  रक्षा मंत्रालय के साथ सहयोग बनाने के लिए एक अन्य समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

सेबी के छूट पत्र-। के अनुसरण में, रक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन एक कंपनी होने के नाते जी.आर.एस.ई. को राष्ट्रीय सुरक्षा चिन्ताओं के कारण उनके द्वारा प्रवेश किए गए विभिन्न तकनीकी सहयोगों का विवरण उद्घाटित करने से सेबी द्वारा छूट प्राप्त है।

प्रतिद्वंद्विता

शिपनिर्माणः-

वर्तमान प्रतिद्वंद्विता के वातावरण में भारत एवं विश्व दोनों में जी.आर.एस.ई. करार संबंधी दायित्वों

को पूरा करने की अपनी योग्यता के आधार पर निरंतर आगे बढ़ती रही है- जिनमें शामिल है तैयार किए गए अथवा मरम्मत किए गए शिपों की समय पर डिलिवरी,  इसके शिपयार्ड की क्षमता एवं सक्षमता तथा इसके वैसलों की कीमत एवं क्वालिटी। कुछ प्रतिद्वंद्वी के पास अधिक संसाधन होते हैं, जबकि दूसरों के पास कम लागत वाले ऑपरेशंस हैं। इसके अलावा, कुछ प्रतिद्वंद्वी के पास किन्हीं प्रकार के वैसलों की मरम्मत अथवा निर्माण का लाभ होता है। रक्षा शिपनिर्माण में जी.आर.एस.ई. के प्रतिद्वंद्वी है- मझगांव डॉक शिपबिल्‍डर्स लिमिटेड, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, हिन्दुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, एल.एण्ड.टी. शिपयार्ड एवं रिलायंस नैवेल एण्ड इंजीनियरिंग लिमिटेड।

इंजीनियरिंग

डेक मशीनरी के घरेलू तथा वैश्विक सार्वजनिक एवं निजी आपूर्तिकर्ताओं से जी.आर.एस.ई. की प्रतिद्वंद्विता है। इनमें शामिल है- अंजना स्टील इंडस्ट्रीज प्रा. लिमिटेड, ब्रिज एण्ड रूफ कं. (इण्डिया) लिमिटेड, एसेन फेब्रिकेटर्स प्रा. लिमिटेड, गौरिका इंडिया लिमिटेड, लकी इंजीनियरिंग कंपनी, मशीन वर्क्स टाटा स्टील लिमिटेड, टीटागढ़ वैगन लिमिटेड, ट्रैको एण्टरप्राइजेज, बिनायक रेल ट्रैक (इंडिया) प्रा. लिमिटेड, विश्व ट्रेडर्स, डब्ल्यु आई. एल. । पुलों के घरेलू एवं वैश्विक उत्पादकों से भी प्रतिद्वंद्विता है।

इंजन उत्पादनः-

वार्टशिला, क्युमिन्स, कैटर पिलर, के. आई.एल. एवं एम. ए. एन. सहित मेरीन इंजनों की आपूर्ति के लिए घरेलू एवं वैश्विक सार्वजनिक एवं निजी प्रतिद्वंद्वी है।

बिक्री एवं विपणनः-

प्रत्येक डिविजन में समर्पित बिजनेश डेवलपमेण्ट टीम है। पोर्टेबल पुल व्यवसाय बिक्री एवं विपणन प्रयत्नों को बढ़ावा देने के लिए एक एजेंसी की सेवाओं का उपयोग करता है।

मानव संसाधनः-

31 जुलाई, 2018 को जी.आर.एस.ई. ने 2155 पूर्णकालिक कर्मचारियों के कार्यदल का नियोजन कर रखा है, जिनमें शामिल हैं- 473 अधिकारी, 141 सुपरवाइजर, 104 कार्यालय सहायक तथा  1437 विभिन्न विभागों में प्रचालन कर्मचारी जबकि लगभग 3285 ठेका श्रमिकों का नियोजन विभिन्न ठेकेदारों द्वारा उनकों दिए गए कार्य को करने के लिए किया गया है। कर्मचारीगण कोलकाता, रांची, दिल्ली, मुबई तथा विशाखापतनम् में विभिन्न फेसिलिटियों में स्थित है। ठेके वाले कार्यबल नियमित रूप में बदलते रहते हैं, जो आवश्यकता तथा दिए गए कार्य के आधार पर लगाए जाते हैं।

प्रचालन तथा कार्यालय सहायक श्रेणी के कर्मचारी यूनियन से संबद्ध है। ऑपरेटिव ट्रेड यूनियन के साथ एक अलग समाधान ज्ञापन होता है, जिसे एक मात्र बारगेनिंग एजेण्ट तथा कार्यालय सहायक यूनियन के रूप में कंपनी द्वारा मान्यता प्राप्त होता है। प्रबंधन एवं कर्मचारियों के बीच संबंध आम तौर पर सौहार्द्रपूर्ण होता है। 

कर्मचारी प्रशिक्षणः-

जी.आर.एस.ई. यह मानती है कि उसके कर्मचारीगण एक बहुमूल्य संसाधन हैं। वे आवश्यक कुशलता तथा विशेषज्ञता से पूरी तरह से लैस हों, यह सुनिश्चित करने के लिए तरह-तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं चाहे वे इन-हाउस हों या वरिष्ठ स्टॉफ द्वारा हो अथवा बाहरी फेकल्टी द्वारा।

उन्हें योग्य प्रशिक्षण द्वारा ऑन-दि जॉब प्रशिक्षण तथा क्लास रूम दोनों तरह के प्रशिक्षण दिए जाते हैं।

सम्पतिः-

पंजीकृत कार्यालय 43/46 गार्डेनरीच रोड, कोलकाता-700024, पश्चिम बंगाल, भारत में अवस्थित है। निम्नलिखित महत्वपूर्ण सम्पतियां या तो स्वामित्व में है अथवा लीज पर हैं:

Name of Property

Location

Size

Main Works Unit

Kolkata, India

48 Acres

FOJ Unit

Kolkata, India

18 Acres

Rajabagan Dockyard

Kolkata, India

31.15 Acres

61 Park Facility

Kolkata, India

11.07 Acres

Taratala Unit

Kolkata, India

3.39 Acres

DEP, Ranchi*

Jharkhand, India

62 Acres

 

इसके अलावा कई परिसंपत्तियों को लीज पर अथवा किराए पर वाणिज्यिक या आवासीय उद्देश्य के लिए लिया गया है।

स्वास्‍थ्‍य, सुरक्षा एवं वातावरणः-

एक प्रभावशाली जोखिम प्रबंधन प्रणाली मौजूद है- स्व-नियामक प्रक्रियाओं तथा पद्धतियों के साथ-यह सुनिश्चित करने के लिए की व्यवसाय को जोखिम सचेतना तरीके से संचालित हो। प्रचालन संबंधी, ठेके संबंधी, वित्तीय व्यवसाय संबंधी एवं सम्मान जनित उत्पन्न होने वाले जोखिमों का संबंधित जोखिम स्वामियों द्वारा आकलन किया जाता है तथा अग्रिम तौर पर उपयुक्त निवारण संबंधी कदम उठाए जाते हैं।

जी.आर.एस.ई.चालू आधार पर सुरक्षित कार्य वातावरण निर्मित व रखरखाव करने के प्रति कृत संकल्प है। कंपनी विस्तृत स्वास्‍थ्‍य, सुरक्षा व पर्यावरण विधि, विनियमों के अधीन है, जो प्रक्रियाओं एवं सुविधाओं से गवर्न होता है। सुरक्षा प्रणाली को क्रियान्वित किया गया है। सुपरवाइजरी पद धारण करने वाले कर्मचारियों को यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि समस्त कर्मचारी इन नीतियों का पालन करें।

विभिन्न इन-हाउस तता कार्यस्थल पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए कर्मचारियों एवं उप ठेकेदार के कामगरों के बीच सुरक्षा जागरुकता बढ़ाने पर भी फोकस किया जाता है।

 

औद्योगिक सुरक्षाः-

जी.आर.एस.ई. की फेसिलिटियों को सरकारी गोपनीयता अधिनियम, 1923 के अधीन एक “वर्जित स्थल” के रूप में प्रमाणित है। अतः औद्योगिक सुरक्षा एक गंभीर महत्व का मामला है। मुख्य कारखाना, राजाबागान डॉकयार्ड तथा एफओजे की भौतिक सुरक्षा केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के ऊपर डाला गया है, जो भारत सरकार का एक केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल है, जो प्रमुख जोखिम भरा संरचना इंस्टालेशन को एकीकृत सुरक्षा प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है।  सशस्त्र कार्मिकों तथा

वायरलेस CCTV सर्विलेंस सिस्टम के साथ चौबीसों घण्टे निगरानी की जाती है, जो समस्त गंभीर लोकेशनों एवं इंस्टालेशनों को कवर करता है। साथ ही शिपयार्ड में प्रवेश करने वाले विभिन्न श्रेणियों के व्यक्तियों के लिए एक बायोमेट्रिक एक्सेस कंट्रोल सिस्टल भी मौजूद है। आगन्तुकों के परिचय के सत्यापन एवं स्क्रुटनी के लिए एक विजिटर्स फेसिलिटेशन सेण्टर भी मौजूद है।

सूचना प्रोद्योगिकीः-

सूचना प्रोद्योगिकी प्रचालन संरचना का एक आवश्यक अवयव है। जी.आर.एस.ई. सूचना प्रोद्योगिकी में निवेश करती है, क्योंकि वह इसका प्रयोग सीधे लागत घटाने, स्केलेबल ऑपरेशन में मदद पहुँचाने, कार्यकुशलता बढ़ाने, बिजनेश जोखिम को कम करने और एक सुरक्षित उद्यम के लिए करती है। संवेदनशील बिजनेश प्रकृति के कारण आई.टी. नीति एवं दिशा निर्देशों को लागू किया गया है, जो सूचना प्रोद्योगिकी के प्रशासन से जुड़ी सुरक्षा नीति को निर्धारित करता है जिसमें शामिल है- आई.टी. उपकरणों की खरीद, कंप्यूटर एसेट्स रिकार्डिंग पद्धति, कंप्यूटर एसेट ऑपरेशन रखरखाव पद्धति, आई.टी. एसेट डिस्पोजल पद्धति, परिवर्तन प्रबंधन नीति तथा डाटा बैंक – अप नीति। साइबर खतरों से होने वाले जोखिम के समाप्त करने के लिए मुंबई में एक ऑपरेशनल रिप्लिका- आधारित डिजास्टर रिकवरी डाटा सेण्टर है, ताकि किसी प्राकृतिक आपदा के मामले में प्रभाव को कम से कम किया जा सके। इसके अतिरिक्त 61 पार्क में 1 जून 2018 के सीडीओ के उद्घाटित डाटा सेण्टर के साथ जी.आर.एस.ई. ने जटिल सूचना प्रोद्योगिकी ऑपरेशन सर्वर उपलब्धता, डिजाइन डाटा की सुरक्षा एवं संरक्षा तथा ग्रीन  कंसेप्ट को बढ़ावा देने के लिए मल्टीप्लायर आवश्यक सक्षमता हासिल कर ली है, जिसके द्वारा उर्जा बचत में योगदान दे रही है।

 

पुरस्कार एवं प्रशंसाः-

जी.आर.एस.ई. ने शिपयार्ड उद्योग में अपने कार्य के लिए वर्षों से बड़ी संख्या में पुरस्कार हासिल किए हैं।

प्रमाणीकरणः-

जी.आर.एस.ई. के पास कई प्रमाणीकरण एव प्रत्यय पत्र मौजूद है, जिनमें शामिल है TUV नॉड का प्रमाणपत्र, जिसमें यह पुष्टि की गयी है कि जहाज निर्माण के लिए कंपनी का प्रबंधन सिस्टम आई.एस.ओ. 14001:2004 तथा बी.एस-ओ.एच.एस.ए.एस. 18001:2007 के अनुसार है तथा भारतीय रजिस्टर क्वालिटी सिस्टम आई.एस.ओ. 9002-1994 / ई.एन. आई.एस.ओ. 9002:2014 के अनुसार है। जी.आर.एस.ई. ने क्वालिटी प्रबंधन सिस्टम के लिए अपनी सभी फेसिलिटियों के लिए आई.एस.ओ. 9001:2008 या आई.एस.ओ. 9001:2015 प्रमाणीकरण भी हासिल की है।

बौद्धिक सम्पत्तिः-

जी.आर.एस.ई. सिंगल लेन पुलों के लिए ढृढ़ीकृत स्टील डेक सिस्टम के लिए पेटेण्ट धारक है तथा दोहरे लेन पोर्टेबल स्टील के पुलों का उत्पादक है जो इसे क्रमशः 2011 और 2007 वर्ष में प्रदान किए गए थे। इतना ही नहीं कामचलाऊ सिंगल लेन स्टील पुल सिस्टम तथा कामचलाऊ स्टील डेकिंग सिस्टम से संबंधित दो और पेटेण्ट आवेदन पत्र प्रमाणीकरण हेतु प्रक्रियाधीन हैं।

 

निगमित सामाजिक दायित्व एवं निरंतरता

हम एक जिम्मेदार निगमित नागरिक के रूप में समाज के वंचित वर्गों तथा अन्य स्टेकधारकों मुख्यतः हमारे कारखानों के आसपास के लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में हमारे निगमित सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के पहलों के अंश के रूप में विभिन्‍न निकास संबंधी  परियोजनाओं  को हाथ में लेने के प्रति कृत संकल्प हैं । हमारी सीएसआर रणनीतियां स्थानीय समुदाय की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुकूल हैं।                             

हमारी सीएसआर नीति कंपनी अधिनियम 2015 की धारा 135 एवं उसके अधीन बनाए  गए नियमों के अनुपालन मे सीएसआर गतिविधियों  के क्रियान्‍वयन हेतु संरचना को पारिभाषित करती है ।

हम एक जिम्मेदार निगमित नागरिक के रूप में समाज के वंचित वर्गों तथा अन्य स्टेकधारकों मुख्यतः हमारे कारखानों के आसपास के लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में हमारे निगमित सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के पहलों के अंश के रूप में विभिन्‍न निकास संबंधी  परियोजनाओं  को हाथ में लेने के प्रति कृत संकल्प हैं । हमारी सीएसआर रणनीतियां स्थानीय समुदाय की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुकूल हैं।                               

हमारी सीएसआर नीति कंपनी अधिनियम 2015 की धारा 135 एवं उसके अधीन बनाए  गए नियमों के अनुपालन मे सीएसआर गतिविधियों  के क्रियान्‍वयन हेतु संरचना को पारिभाषित करती है ।

हम विभिन्न पहलों के जरिए उपेक्षित क्षेत्र की जीवन शैली सुधारने की दिशा में कार्य कर रहे हैं जैसे ‘’स्किल इंडिया मिशन’’  के साथ तालमेल रखते हुए कोशल  विकास पहल, टॉयलेट का निर्माण , ‘’स्वच्छ भारत अभियान’’  के अधीन स्कूली बच्चों को प्रशिक्षण जिससे योग्य व्यक्तियों का अलग से सशक्तिकरण किया जा रहा है, स्वास्थ्य संबंधी पहलों,संरचना एवं स्थानीय आंगनबाड़ी में क्षमता निर्माण भी किया जा रहा है ।

वित्त वर्ष 2018 में राष्ट्रीय प्राथमिकता संबंधी पहलों  को पूरा करने की दिशा में निम्नलिखित सीएसआर परियोजनाओं को हाथ में लिया है :

 

  1. स्किल इंडिया परियोजनाएं
    • जीआरएसई ने कौशल विकास प्रशिक्षण देने के लिए लगभग 400 प्रशिक्षुओं की नियुक्ति की है , जो कि कंपनी के संख्‍या बल से 100% से भी अधिक है ।
    • जी आर एस ई ने प्रशिक्षण सुविधाओं को उन्नत करने हेतु आईटीआई टालीगंज तथा महिला आईटीआई कोलकाता को भी सहयोग किया है औद्योगिक निरीक्षण आयोजन मेधावी छात्रों को पुरस्कार, पूर्व प्‍लेसमेंट तथा कैरियर गाइडिंग प्रशिक्षण, प्रशिक्षकों को उन्‍नत प्रशिक्षण कार्य कुशलता प्रतियोगिता में सहभागिता हेतु प्रायोजकता जैसी विभिन्न गतिविधियां सहयोगप्राप्त आईटीआई के लिए आयोजित की गईं ।
    • जी आर एस ई ने मस्तिष्‍क पक्षाघात से त्रस्त बच्चों के लिए वृहद् शैक्षिक एवं पुनर्वास सेवाएं प्राप्त करने के लिए वर्ष 2010-11 से इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सेरेब्रल  पैलसी के साथ भागीदारी की है । विगत 8 वर्षों से इस योजना द्वारा प्रतिवर्ष कुल 43 बच्चों को सहयोग प्रदान किया गया है जो कि गंभीर रूप से बहु दुर्बलता से पीड़ित हैं ।

 

  1. स्वच्छ भारत मिशन

क) जीआरएसई  ने विभिन्न विद्यालयों में स्वच्छ विद्यालय अभियान के व्यापक दायरे के अंतर्गत बहुआयामी हस्तक्षेप चालू किया है जीआरएस मटियाब्रुज एवं महेशतला क्षेत्रों में स्थित 10 स्थानीय सरकारी विद्यालयों में वर्ष के दौरान कुल 65 शौचालयों का निर्माण करवाया है।

ख) शौचालय का रखरखाव जीआरएसई की नई पहल है जिसकी अत्यधिक सराहना स्कूलों एवं विद्यालय के अधिकारियों द्वारा की गई है।  सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस ऑर्गेनाइजेशन को 8 विद्यालयों में परियोजना के क्रियान्वयन हेतु लगाया गया है, जिनमें विगत कुछ वर्षों में शौचालयों का निर्माण जीआरएसई द्वारा करवाया गया था।

ग ) युवा हो रही किशोरियों के मासिक-धर्म संबंधी एवं 04 स्थानीय कन्‍या विद्यालयों के समग्र स्वास्थ्य को उन्नत बनाने के लिए इंसिलेटर लगाए गए हैं ।

4 नए आंगनबाड़ी केंद्रों पर जल परिष्कारकों की स्थापना, शिशु हितकारी शौचालयों का निर्माण, बर्तन एवं दवाओं जैसी संरचना विकास की सुविधाएं उपलब्ध करवाई गईं । उनके कार्यकर्ताओं तथा हेल्परों को क्षमता-निर्माण प्रशिक्षण प्रदान किए गए थे ।

च ) एक वर्ष तक 5000 स्कूली बच्चों को जल,जल निकासी तथा स्वास्थ्य (प्रक्षालन )  अभ्यास का  गहन प्रशिक्षण दिया गया, ताकि उनमें दीर्घकालीन  व्यवहारवादी परिवर्तन आए और इन बच्चों को समाज  में परिवर्तन एजेंट के रूप में तैयार किया गया ।

छ ) रक्षा मंत्रालय के दिशा निर्देशों के अनुपालन में जीआरएसई  ने रु. 0.6 मिलियन स्वच्छ भारत कोष में तथा 0.4 मिलियन निर्मल गंगा कोष में योगदान दिया है ।

ज) जीआरसएई ने इन विद्यालयों को 76 अदद  हरे व नीले रंग के कूड़ादान प्रदान किए, ताकि कूड़ों  को अलग अलग करने में सुविधा हो ।  इस परियोजना से इन विद्यालयों की समग्र जल निकास स्थिति में सकारात्मक सुधार हुआ है ।

झ) परियोजनाओं की सफलताओं अथवा असफलताओं की डिग्री मापने हेतु वित्त वर्ष 2016-17 की  परिपूर्ण परियोजनाओं/गतिविधियों का मूल्यांकन नेशनल सीएसआर हब-टीआईएसएस  द्वारा किया गया है।

 

  1. अन्य परियोजनाएं
  • जीआएसई ने रांची, झारखंड में विकलांग व्‍यक्तियों के लिए सुविधा सहायक उपकरण को प्रदान / वितरण करने के लिए आर्टिफिशियल लिंब मैन्‍युफैक्‍चरिंग कारपोरेशन आफ इंडिया (ALIMCO) के साथ भागीदारी की है । परियोजना का लक्ष्‍य है – सुविधा एवं सहायक उपकरणों की एक विस्‍तृत श्रृंखला प्रदान करना , जिसमें शामिल है – व्हील चेयर , ट्राइसाइकिल, चलने-फिरने में विकलांग व्यक्तियों के लिए बैसाखियां, श्रवण –यंत्रों एवं एम एस आई इ डी किट्स तथा दृष्टिहीन लोगों के लिए ब्रेल किट और  स्मार्ट किट ।कुल 249 समाज के अलग-थलग पड़े  वर्ग के विकलांग व्यक्तियों को उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार हेतु उपकरण प्रदान किए गए ।
  • हर महीने के आखिरी शनिवार को 61 पार्क यूनिट में मासिक स्वास्थ्य चेकअप शिविर / क्लिनिक आयोजित किए जाते हैं, जिनमें औसतन 250-300 रोगियों की जांच की गई एवं दवा प्रदान की गई ।
  • रक्तदान शिविर आयोजित किए गए, जिनमें कर्मचारियों ने उन रोगियों के लिए रक्तदान किए जो थलसेमिया , हेमोफीलिया से पीड़ित थे अथवा सड़क दुर्घटना के शिकार हुए ।

 

हमारे इतिहास में प्रमुख घटनाऍं :

निम्‍नलिखित तालिका हमारी कंपनी के इतिहास में प्रमुख घटनाऍं दर्शाती हैं :

कलेण्‍डर वर्ष

प्रमुख घटनाऍं

1961

आईएनएस अजय देश के देशी युद्धपोत का निर्माण, जो कि भारत की स्‍वाधीनता के उपरांत देश में निर्मित प्रथम नैवल शिप ।

1980

भारतीय तटरक्षक के लिए गश्‍ती जलयान सीजीएस राजहंस निर्मित (जीआरएसई यार्ड 2003)

1981

भारतीय नौसेना के लिए सर्वेक्षण जलयान की डिजाइन तथा निर्माण । यह 1900 टन शिप, आईएनएस संधायक का प्रदाय 26 फरवरी 1981 को किया गया ।

1984

अपनी तरह का प्रथम लैंडिंग शिप टैंक (लार्ज) की इन-हाउस डिजाइन तथा निर्माण ।

1992

नई डिजाइन एफपीवी के क्‍लास शिप, सीजीएस प्रियदर्शिनी (हमारी कंपनी यार्ड 2031) की डिलिवरी सभारतीय तटरक्षक को 3 मार्च,1992 को की गई ।

1994

क्‍लास पी-16ए गाइडेड मशिाईल फ्रिगेट ''आईएनएस ब्रह्मपुत्र'' (हमारी कंपानी यार्ड 3009) को 26 जनवरी, 1994 को लांच किया गया था ।

अनुसंधान जलयान निर्मित, जिसे ''सागर ध्‍वनि'' नाम यानी ''समुद्र की आवाज'' दिया गया ।

1997

भारत में पहली बार पोर्टेबल स्टील ब्रिज की डिजाइन बनाई गई एवं निर्माण किया गया।

2000

क्‍लास फास्‍ट अटैक क्राफ्ट (हमारी कंपनी यार्ड नं. 2047) का निर्माण एवं प्रदाय    11  सितंबर 2000 को गहन परीक्षण के बाद किया गया ।

2009

2 डब्‍ल्‍युजे- एफएसी आईएनएस कारनिकोबार एवं आईएनएस चेटलाट की डिलीवरी भारतीय नौसेना को 9 जनवरी 2009 को की गई।

2011

हमारी कंपनी ने 4 मार्च 2011 को मॉरीशस के राष्ट्रीय तटरक्षक के लिए एक मल्टी-रोल ऑफ शोर पेट्रौल वेसल सीजीएस बाराकुडा के निर्माण के करार पर युद्धपोत के निर्यात हेतु हस्ताक्षर किए । सीजीएस बाराकुडा को आधुनिकीकरण के अधीन हमारी कंपनी में तैयार की गई नई एकीकृत जहाज निर्माण सुविधा में बनने वाले प्रथम शिप होने का भी सम्मान प्राप्त है।

2014

क्लास ए एस डब्ल्यू कार्वेट, आईएनएस कमोर्टा की डिलीवरी भारतीय नौसेना को 12 जुलाई 2014 को की गई।

2016

चार (4) फॉलो ऑन का पहला डब्लूजे- एफएसी आईएनएस तरमुगली (यार्ड नंबर 2109) की डिलीवरी भारतीय नौसेना को 16 अप्रैल 2016 को की गई।

2016-2017

क्लास नई पीढ़ी वाले लैंडिंग क्राफ्ट के 2 शिपों की डिलीवरी भारतीय नौसेना को 30 सितंबर 2016 एवं 20 जुलाई 2017 को की गई।

2017

क्‍लास एएसडब्‍ल्‍यु कार्वेट का आईएनएस किल्‍टान (यार्ड नं 3019) की डिलिवरी भारतीय नौसेना को 14 अक्टूबर 2017 को की गई।

2018

चौथे एलसीयू ‘’एल 54’’ की डिलीवरी भारतीय नौसेना को 6 अप्रैल 2018 को की गई।

2018

जीआरएसई  के 61 पार्क यूनिट में सेंट्रल डिजाइन ऑफिस का उद्घाटन 1 जून 2018 को किया गया ।

2018

जीआरएसई की तारातला यूनिट में आधुनिक पंप टेस्ट बेड फैसिलिटी का उद्घाटन 11 जून 2018 को किया गया ।

2018

61 पार्क यूनिट में सेंट्रल डिजाइन ऑफिस के वर्चुअल रियलिटी लैब का उद्घाटन 7 जुलाई 2018 को किया गया ।


Awards and Recognition

Our Company has received the following awards:

Year of Award

Award

2006

Accorded the status of Mini Ratna - Category I

2010-11

Best Performing Defence Shipyard

2010-11

Excellent grading under MoU signed with the GoI

2011-12

Best Performing Defence Shipyard

2011-12

Excellent grading under MoU signed with the GoI

2011-12

Indira Gandhi Rajbhasha Puraskar – 2nd prize in ‘C’ region for the implementation of official language Hindi in our Company

2012-13

Best Performing Defence Shipyard

2012-13

Indira Gandhi Rajbhasha Puraskar – 1st prize in 'C' region for implementation of official language Hindi under PSU category

2012-13

Excellent grading under MoU signed with the GoI

2013-14

Best Performing Defense Shipyard

2013-14

Excellent grading under MoU signed with the GoI

2014-15

National Talent Management Leadership Award 2015 in the Best Onboarding Program category from the World HRD Congress

2014-15

Most Caring Company Award at CSR Congress-2015

2014-15

Rajbhasha Kirti Puraskar – 2nd prize in ‘C’ region for excellence in implementation of official language policy under PSU category

2015-16

Raksha Mantri’s Award for in-house design effort of CGS Barracuda

2015-16

Rajbhasha Kirti Puraskar – 1st prize for excellence in implementation of official language in our Company.

2016

Quality leadership award by Quality Circle Forum of India

2016

Rajbhasha Kirti Puraskar – 2nd prize for excellence in implementation of official language

2016

Rajbhasha Kirti Puraskar – 2nd prize for the magazine ‘Rajbhasha Jagriti’

2017

Quality Leadership Award by Quality Circle Forum of India

2017

Runner-up in the category of ‘Contribution of Women in PSEs’ by ICC

2017

Runner-up in the category of ‘Human Resource Management’ by ICC

2017

Runner-up in the category of ‘CSR & Sustainability’ by ICC

2017

ICC PSE Excellence Award in the category of “Company of the Year”

2017

ICC PSE Excellence Award in the category of “Corporate Governance”

2017

SCOPE Corporate Communication Excellence Award 2017 in the category of Brand Building through Inclusive Growth Initiatives

2017

SCOPE Corporate Communication Excellence Award 2017 in the category of Best Corporate Communication Campaign/ Program (External)

2018

ET Bengal Corporate Award on Best CSR Idea - 2018 awarded by the Economic Times Group

 

Accreditations and Certifications

Our Company has received the following accreditations and certifications:

Certificate

Issued on

Valid Till

Particulars

Main Works Unit

ISO 14001:2004 - Management System

 July 30, 2017

September 14, 2018

TUV NORD CERT certified the management system of our Company in line with the standard of ISO 14001-2004 for the scope of manufacturing of ships

BS OHSAS 18001:2007 - Management System

July 30, 2017

July 29, 2020

TUV NORD CERT certified the management system of our company in line of the standards of BS OHSAS 18001:2007 for the scope of manufacturing of ships

ISO 9001:2015 - Quality Management System Standard

December 13, 2016

December 12, 2019

Indian Register Quality Systems certified the management system of Main Works Unit and Design Office to conform to the quality management system standard of ISO 9001:2015 for ship design, ship building and ship repair.

61 Park Unit

ISO 9001: 2015 - Quality Management System Standard

June 22, 2018

June 22, 2021

Indian Register Quality Systems certified the management system of our Company to conform to the quality management system standard of ISO 9001:2015 for design, manufacture and supply of portable steel bridges.

FOJ Unit       

ISO 9001:2015 - Quality Management System Standard

December 13, 2016

December 12, 2019

Indian Register Quality Systems certified the management system of our Company to conform to the quality management system standard of ISO 9001:2015 for ship design, ship building and ship repair.

Deck Machinery Taratala Unit

ISO 9001: 2015 - Quality Management System Standard

June 27, 2018

June 26, 2021

Indian Register Quality Systems certified the management system of our Company to conform to the quality management system standard of ISO 9001:2015 for design, development, manufacture, supply and service of Deck Machinery equipment and its accessories

Rajabagan Dockyard

ISO 9001: 2008 - Quality Management System Standard

January 30, 2016

September 14, 2018

Indian Register Quality Systems certified the management system of our Company to conform to the quality management system standard of ISO 9001:2008 for ship building, delivery of ships after sea trial and post delivery services.

Baranagar Training Centre Unit

ISO 9001: 2008 - Quality Management System Standard

 

January 6, 2016

September 14, 2018

Indian Register Quality Systems certified the management system of our Company to conform to the quality management system standard of ISO 9001:2008 for training of trade apprentices and marine engineers.

DEP, Ranchi Unit

ISO 9001:2008 - Quality Management System Standard

October 22, 2015

October 21, 2018

Indian Register Quality Systems certified the management system of our Company to conform to the quality management system standard of ISO 9001:2008 for manufacture and supply of diesel engines including assembly, testing and servicing of engines, fabrication and machining of general engineering items.

 

OUR MANAGEMENT

Board of Directors

Under the Articles of Association, our Company is required to have a minimum of three (3) Directors. We currently have ten (10) Directors, out of which five (5) are Part-Time Non-Official (Independent) Director, four (4) are Whole Time Directors and one (1) is Government Nominee Director.

The following table sets forth the details regarding the Board as of the date of this Red Herring Prospectus:

S.

No.

Name, Designation, Address, Occupation, Nationality, DIN and Term

Age

(in years)

Other Directorships

1.       

RAdm Vipin Kumar Saxena, IN (Retired)

Designation: Chairman & Managing Director

Address: 11 New Road, Alipore, Kolkata – 700 027, West Bengal, India

Occupation: Service

Nationality: Indian

DIN: 07696782

Term: Five (5) years with effect from March 01, 2017 (the date of assumption of charge) in the first instance or till the date of his superannuation or until further orders, whichever is the earliest.

56

 

Nil

2.       

Sarvjit Singh Dogra

Designation: Director (Finance) & CFO

Whole Time Director

Address: 27, Chetla Central Road, Flat 2B, 2nd Floor, Kolkata - 700 027, West Bengal, India

Occupation: Service

Nationality: Indian

DIN: 07052300

Term: Five (5) years with effect from December 31, 2014 (the date of assumption of charge) in the first instance or till the date of his superannuation or until further orders, whichever is the earliest.

58

Nil

3.       

Asit Kumar Nanda

Designation: Director (Personnel)

Whole Time Director

Address: Shantikunj, P-374, Nalini Ranjan Road, New Alipore, Kolkata - 700 053, West Bengal, India

Occupation: Service

Nationality: Indian

DIN: 07506042

Term: Five (5) years with effect from May 3, 2016 (date of assumption of charge) in the first instance or till the date of his superannuation or until further orders, whichever is the earliest.

58

Nil

4.       

Cmde Sanjeev Nayyar, IN (Retired)

Designation: Director (Shipbuilding)

  Whole Time Director

Address: Flat No. 18D, Tower D (Cedar), South City Residence, 375, Prince Anwar Shah Road, Kolkata – 700 068 West Bengal, India

Occupation: Service

Nationality: Indian

DIN: 07973950

Term: With effect from December 16, 2017 (date of assumption of charge) till the date of his superannuation or until further orders, whichever is earlier.

56

Nil

5.       

Ashwani Kumar Mahajan

Designation: Government Nominee Director

Address: D-09, HUDCO Place Extension, Andrews Ganj, New Delhi – 110 049, India

Occupation: Service

Nationality: Indian

DIN: 07483427

Term: With effect from April 2, 2016 till further orders from the Government.

55

Bharat Dynamics Limited (Director)

 

6.       

Bharat Bhushan

Designation: Part-Time Non-Official (Independent) Director

Address: C-11, Ahinsa Vihar, Sector-9, Rohini, New Delhi - 110 085, India

Occupation: Professional

Nationality: Indian

DIN: 00262278

Term: Three (3) years with effect from September 15, 2017 (date of notification of their appointment) or till further orders from the Government, whichever is earlier.

52

Nil

7.       

Kanwaljit Deol

Address: A-78, NSG Society, P6, Greater Noida – 201310, Uttar Pradesh, India

Designation: Part-Time Non-Official (Independent) Director

Occupation: Retired IPS Officer

Nationality: Indian

DIN: 03192289

Term: Three (3) years with effect from September 15, 2017 (date of notification of appointment) or till further orders from the Government, whichever is earlier.

63

Nil

8.       

Dr. Ajai Bhandari

Address: Suraj Kunj Building, Sector-5, Shimla -171009, Himachal Pradesh, India

Designation: Part-Time Non-Official (Independent) Director

Occupation: Retired IAS Officer

Nationality: Indian

DIN: 00322233

Term: Three (3) years with effect from March 9, 2018 (date of notification of their appointment) or till further orders from the Government, whichever is earlier.

64

Nil

9.       

RAdm Inder Paul Singh Bali, IN (Retired)

Address: C-1/11, Bapanagar, Zakir Hussain Marg, New Delhi-110 001, India

Designation: Part-Time Non-Official (Independent) Director

Occupation: Indian Navy Retired

Nationality: Indian

DIN: 07912223

Term: Three (3) years with effect from March 9, 2018 (date of notification of their appointment) or till further orders from the Government, whichever is earlier.

58

Nil

10.     

Dr. Biswapriya Roychoudhury

Address: Fulbari, Manaskamana Road, English Bazar, Malda, West Bengal-732101

Designation: Part-Time Non-Official (Independent) Director

Occupation: Doctor (Homeopathy)

Nationality: Indian

DIN: 08200896

Term: Three (3) years with effect from August 15, 2018 (date of allotment of DIN) or till further orders from the Government, whichever is earlier.

56

Nil

All the Directors of our Company are Indian nationals and none of the Directors are related to each other.

Brief Biographies of the Directors

Rear Admiral Vipin Kumar Saxena, IN (Retired)

RAdm Vipin Kumar Saxena, IN (Retired), aged fifty-six (56) years and having an experience of over thirty-three (33) years was appointed as the Chairman & Managing Director of our Company with effect from March 1, 2017 and is responsible for the overall management of our Company. Prior to joining our Company, he has put in over thrity-one (31) years of commissioned service in the Indian Navy since March 05, 1985 after completing Bachelor of Engineering (Electrical) from Jabalpur University. He also holds a Master of Science degree in Defence Studies from Madras University.He has varied experience and exposure of working in various organisations of the Indian Navy ranging from operational appointment on-board frontline warships, naval dockyards, warship acquisitions & construction programmes and project management at apex level for mega infrastructure project of the Indian Navy. As Principal Director (Ship Production) at Naval Headquarters, New Delhi he has handled various aspects of shipbuilding while managing multiple major contracts for construction of a number of warships both at Indian Shipyards (DPSUs & private) and foreign shipyards.

Sarvjit Singh Dogra

Sarvjit Singh Dogra, aged fifty-eight (58) years and having an experience of over thirty-two (32) years was appointed as Director (Finance) of our Company with effect from December 31, 2014 and heads the finance function of our Company. He is a qualified fellow member of the Institute of Costs Accountants of India. He has served in the Fertilizer Corporation of India Limited as Grade II - Accounts Officer. Thereafter, he has served in National Aluminum Company Limited, a Navratna CPSE under the Ministry of Mines, GoI, prior to joining our Company.

Asit Kumar Nanda

Asit Kumar Nanda, aged fifty-eight (58) years and having an experience of over thirty-three (33) years was appointed as Director (Personnel) of our Company with effect from May 03, 2016 and heads the human resource function of our Company. He holds a Bachelors’ Degree in Law from Sambalpur University and a Masters’ Degree in Social Work (Specialisation in Personnel Management & Industrial Relations) from Devi Ahilya Vishwavidhyalya, Indore. He is also credited with holding a Post-Graduate Diploma in human resource management from Indira Gandhi National Open University. He has worked for over three decades in the field of Human Resources Management in Central Public Sector Undertakings viz. ITI Limited, Hindustan Aeronautics Limited & BEML Limited both at the manufacturing & corporate level. Prior to joining our Company, he was working as CGM (HR) in BEML Limited.

Commodore Sanjeev Nayyar, IN (Retired)

Cmde Sanjeev Nayyar, IN (Retired), aged fifty-six (56) years and having an experience of over thirty-six (36) years, assumed charge as Director (Shipbuilding) of our Company with effect from December 16, 2017 and heads the shipbuilding division of our Company. Prior to joining GRSE, he has put in over thirty-five (35) years of commissioned service in the Indian Navy from July 1, 1982. He holds a Bachelor of Science and a Bachelor of Technology degree in Mechanical Engineering from Jawaharlal Nehru University, Delhi. He went on to obtain a Master of Technology degree in Design of Mechanical Equipment from IIT, Delhi, and a Master of Management Studies from Osmania University, Hyderabad.

Ashwani Kumar Mahajan

Ashwani Kumar Mahanjan, aged fifty-five (55) years and having an experience of over twenty-eight (28) years was appointed as a Government Nominee Director of our Company with effect from April 02, 2016. He holds a degree in Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery, from Medical College, Amritsar. He is a cadre of the Indian Revenue Service (IRS) and has previously worked in the Income Tax Department. Presently, he is working as Additional Financial Advisor & Joint Secretary, DDP.

Bharat Bhushan

Bharat Bhushan, aged fifty-two (52) years and having an experience of twenty-eight (28) years in the practice of chartered accountancy, was appointed as a Part-Time Non-Official (Independent) Director of our Company with effect from September 15, 2017. He holds a degree in Bachelor of Commerce from Punjabi University and is a Fellow Member of the Institute of Chartered Accountants of India. Presently, he is a Partner in Chandiwala Virmani & Associates since 2004. He also has post-qualification certification in Information Systems Audit.

Kanwaljit Deol

Kanwaljit Deol aged sixty-three (63) years and having an experience of thirty-eight (38) years was appointed as a Part-Time Non-Official (Independent) Director of our Company with effect from September 15, 2017. She holds a Masters Honours degree in Physics from Panjab University and a Bachelors’ degree in Law from University of Delhi. She was appointed into the Indian Police Service in 1977 and assigned to the Union Territories cadre. During thirty-eight (38) years of service in the police she has been posted in Delhi, Goa and Arunachal Pradesh, and has received training in various aspects of policing, vigilance, road traffic and transport, and human rights in India and abroad.

She also served as Additional Secretary in charge of Parliament Security in the Lok Sabha. In 2010 she headed the police force of the state of Arunachal Pradesh as its Director General of Police. In December 2012 she was appointed as Director General in charge of investigations with the National Human Rights Commission, New Delhi, until her retirement on October 31, 2014.

Dr. Ajai Bhandari

Dr.  Ajai Bhandari, Indian Administrative Services (Retired) aged sixty-four (64) years and having an experience of thirty-six (36) years in various executive capacities in middle and senior levels under the State Government of Himachal Pradesh. He was appointed as Part-Time Non-Official (Independent) Director of our Company with effect from March 9, 2018. He holds a Ph.D. in Life Sciences and Masters’ in Science (Botany) degree from the Himachal Pradesh University. He was Secretary to the State Government and held the Secretary level posts. He served as Managing Director and Chief Executive Officer of various Publice Sector Undertakings of the State. He also served in various positions in financial, power, legislative, developmental and other sectors in the State.

RAdm Inder Paul Singh Bali, IN (Retired)

Inder Paul Singh Bali, aged fifty-eight (58) years and having an experience of over thirty-four (34) years in the Indian Navy and Ministry of Defence, was appointed as a Part-Time Non-Official (Independent) Director of our Company with effect from March 9, 2018. During his career, he has held many positions at senior management level in administration, policy formulation & execution, technology evaluation & implementation, management of production work centers as well as management of marine infrastructure in the Navy. He holds a degree in Bachelor of Engineering (Electrical) from NITSRI and a Bachelor of Engineering degree in Industrial Engineering from the Institution of Electronics and Telecommunication Engineers, India. He is alumnus of Naval War College (Mumbai). He also holds a Master of Technology degree in Communication & Radar Engineering from IIT, Delhi. He was decorated with the prestigious Ati Vishisht Seva Medal (AVSM) and Vishisht Seva Medal (VSM) awards by the President of India for professional excellence and outstanding contribution to the Service.

Dr. Biswapriya Roychoudhury

Dr. Biswapriya Roychoudhury, aged fifty-six (56) years was appointed as a Part-Time Non-Official (Independent) Director of our Company for a term of three (3) years with effect from August 15, 2018. He is a homeopathic doctor by profession.


Corporate Governance

In addition to the applicable provisions of the Companies Act, 2013 and DPE Guidelines on Corporate Governance for Central Public Sector Enterprises with respect to corporate governance, provisions of the SEBI Listing Regulations will also be applicable to our Company immediately upon the listing of the Equity Shares on the Stock Exchanges.

Our Chairman & Managing Director is an executive Director. Our Company currently has ten (10) Directors, of which four (4) are executive Directors, one (1) is Government Nominee Director and five (5) are Part-Time Non-Official (Independent) Directors out of which one is a woman Director.

Pursuant to MCA notification dated June 5, 2015, the Central Government has exempted/ modified the applicability of certain provisions of the Companies Act, 2013 in respect of Government Companies. In accordance with this notification, the DPE Guidelines on Corporate Governance for CPSE and pursuant to our Articles, matters pertaining to, among others, appointment, remuneration and performance evaluation of our Directors are determined by the President of India. Further, our Statutory Auditor is appointed by the Comptroller and Auditor General of India. Accordingly, in so far as the aforestated matters are concerned, the terms of reference of our HR, Nomination and Remuneration Committee and Audit Committee only allow these committees to take on record the actions of the President of India or the Comptroller and Auditor General of India, as the case may be.

Other than as described above, our Company is in compliance with corporate governance norms prescribed under SEBI Listing Regulations, including in relation to the composition of its committees, such as the Audit Committee; Stakeholders Relationship Committee; HR, Nomination and Remuneration Committee; CSR & Sustainability Committee and Risk Management Steering Committee, policy on related party transactions, whistle blower policy (including setting up of vigil mechanism), policy on preservation of documents, familiarisation program for part-time non-official (independent) directors, policy on code of conduct and policy for determining materiality of an event/information for making adequate disclosure of such an event/ information before the stock exchanges and for identification of material subsidiaries.

The corporate governance framework is based on an effective independent Board, separation of the Board’s supervisory role from the executive management team and constitution of the Board Committees, as required under law.

The Board of Directors functions either as a full board or through various committees constituted to oversee specific operational areas. Our Company’s executive management provides the Board with detailed reports on its performance periodically.

The details of the Audit Committee, HR, Nomination & Remuneration Committee, Risk Management Steering Committee, CSR & Sustainability Committee and IPO Committee are given below:

In terms of the provisions of the Companies Act, 2013 and the SEBI Listing Regulations, our Company has constituted/ reconstituted the following Board-level committees:

  • Audit Committee;
  • HR, Nomination and Remuneration Committee;
  • CSR & Sustainability Committee; and
  • Stakeholders Relationship Committee.


  1. Audit Committee

The Audit Committee was re-constituted pursuant to the circular resolution adopted on March 20, 2018. The Committee presently comprises of the following members:

Name of the Directors

Position in the Committee

Designation

Bharat Bhushan

Chairman

Part-Time Non-Official (Independent) Director

Kanwaljit Deol

Member

Part-Time Non-Official (Independent) Director

RAdm Inder Paul Singh Bali, IN (Retired)

Member

Part-Time Non-Official (Independent) Director

Cmde Sanjeev Nayyar, IN (Retired)

Member

Director (Shipbuilding)

Our Director (Finance) is a permanent special invitee on our Audit committee and our Company Secretary is the secretary of the Audit Committee.

Scope and terms of reference: The scope and function of the Audit Committee is in accordance with Section 177 of the Companies Act, 2013, Regulation 18(3) of the SEBI Listing Regulations and the guidelines on corporate governance on Central Public Sector Enterprises issued by the DPE.

Terms of reference for the Audit Committee are as follows:

  1. To assist the Board in its oversight functions relating to:
    1. quality and integrity of disclosures contained in the audited and unaudited financial statements;
    2. compliance with legal and regulatory requirements;
    3. qualifications, experience, performance and independence of external auditors;
    4. integrity of the internal controls established from time to time; and
    5. investments of our Company.
  2. To investigate into any matter in relation to the items specified in Section 177 of the Companies Act, 2013 or referred to it by the Board and for this purpose, shall have full access to information contained in the records of our Company and seek external professional advice, if necessary.
  3. To investigate any activity within its terms of reference.
  4. To seek information from any source including employees.
  5. To obtain outside legal or other professional advice, if necessary.
  6. To secure attendance of outsiders with relevant expertise, if it considers necessary.
  7. To protect whistle blowers.
  8. Overseeing our Company’s financial reporting process and the disclosure of its financial information to ensure that the financial statements are correct, sufficient and credible.
  9. Reviewing with the management, the quarterly / half yearly financial statements before submission to the Board for approval.
  10. Reviewing with the management, annual financial statements and auditors report thereon before submission to the Board for approval, with particular reference to:
    1. Matters required to be included in the Directors’ Responsibility Statement to be included in the Board’s report in terms of clause (3)(c) of Section 134 of the Companies Act,2013;
    2. Changes, if any, in accounting policies and practices and reasons for the same;
    3. Major accounting entries involving estimates based on the exercise of judgment by management;
    4. Significant adjustments made in the financial statements arising out of audit findings;
    5. Compliance with accounting standards issued by the Institute of Chartered Accountants of India;
    6. Compliance with legal requirements relating to financial statements;
    7. Disclosure of any related party transaction; and
    8. Qualifications in the draft audit report.

  11. Audit(s)
    1. Internal Audit:
      1. Reviewing, with the management, performance of internal auditors (external firms) and adequacy of internal control systems.
      2. Reviewing the adequacy of internal audit (in house) function, if any, including the structure of internal audit department, staffing and seniority of the official heading the department, reporting structure coverage and frequency of such audit.
      3. Discussion with internal auditors on any significant findings and follow up thereon.
      4. Recommending to the Board appointment and fixation of fees for Internal Auditors for Audit and other services if any.
    2. Statutory Audit & Branch Audit:
      1. Discussion with Statutory Auditors & Branch Auditors before the audit commences, about the nature and scope of audit as well as post-audit discussion to ascertain any area of concern.
      2. Discussion with Statutory Auditors & Branch Auditors on any significant findings and follow up thereon.
      3. Recommending to the Board the fixation of Statutory and Branch Audit Fees.
      4. Approval of payment to statutory auditors for any other services (other than audit) rendered by them.
    3. Cost Audit & Tax Audit:
      Recommending to the Board, the appointment, re-appointment and if required, replacement or removal of cost auditors and tax auditors and fixation of Audit fees and other terms of appointment. 
  12. Reviewing and monitoring the auditors’ independence and performance and effectiveness of audit process.
  13. Review the Cost Audit Report along with full information and explanation on every reservation or qualification contained therein and recommend the report to the Board for consideration
  14. Provide an open avenue of communication between the independent auditor, internal auditor and the Board of Directors.
  15. Review with the independent auditors the co-ordination of audit efforts to assure completeness of coverage, reduction of redundant efforts, and the effective use of all audit resources.
  16. Consider and review the following with the independent auditors and management:
    1. The adequacy of internal controls including computerized information system controls and security, and
    2. Related findings and recommendations of the Independent auditor and internal auditor, together with the management responses.
  17. Consider and review the following with the management, internal auditor and the independent auditor:
    1. Significant finding during the year, including the status of previous audit recommendations
    2. Any difficulties encountered during audit work including any restrictions on the scope of activities or access to required information.
  18. Government audit: To review the follow up action on the audit observations of the C&AG audit.
  19. Reviewing the findings of any internal investigations by the internal auditors/statutory auditors/other agencies into matters where there is suspected fraud or irregularity or a failure of internal control systems of a material nature and reporting the matter to the Board.
  20. To look into the reasons for substantial defaults in the payment to the depositors, debenture holders, shareholders (in case of non-payment of declared dividends) and creditors.
  21. To review the functioning of the Whistle Blower Mechanism.
  22. To review the follow-up action taken on the recommendations of committee on public undertakings (COPU) of the Parliament.
  23. Review and pre-approve all related party transactions in our Company. For this purpose, the Audit Committee may designate a member who shall be responsible for pre-approving related party transactions.
  24. Review our Company’s financial policies, commercial policies and risk management policies.
  25. Evaluation of internal financial controls and risk management system.
  26. Reviewing with the management, the statement of uses/application of funds raised through an issue (public issue, right issue, preferential issue etc.), the statement of funds utilized for purposes other than those stated in this offer document/prospectus/notice, and the report submitted by the monitoring agency monitoring the utilization of proceeds of a public or right issue, and making appropriate recommendations to the Board to take up steps in this matter.
  27. Scrutiny of inter-corporate loans and investments.
  28. Valuation of undertakings or assets of our Company, wherever it is necessary.
  29. Approval or any subsequent modification of transactions of our Company with related parties.
  30. Review the following information:
    1. The management discussion and analysis of financial condition and results of operations;
    2. Statement of significant related party transactions (as defined by the Audit Committee), submitted by the management;
    3. Management letter / letters of internal control weaknesses issued by the statutory auditors;
    4. Internal audit reports relating to internal control weaknesses;
    5. The appointment, removal and terms of remuneration of internal auditors/chief internal auditor; and
    6. Certification / declaration of financial statements by the chief executive/chief finance officer.
  31. To call for comments of the auditors about internal control systems, the scope of audit, including the observations of the auditors and review of financial statement before their submission to the Board and to discuss any related issue with the internal and statutory auditors and the management of our Company.
  32. Carrying out such other functions as may be specifically referred to the Committee by our Company’s Board of Directors and/or other Committees of Directors.

b.  HR, Nomination and Remuneration Committee

The HR, Nomination and Remuneration Committee was re-constituted pursuant to a circular resolution adopted on March 20, 2018. It was renamed as HR, Nomination and Remuneration Committee by circular resolution adopted on November 01, 2017.

The Committee presently comprises of the following members:

Name of the Directors

Position in the Committee

Designation

Kanwaljit Deol

Chairman

Part-Time Non-Official (Independent) Director

Bharat Bhushan

Member

Part-Time Non-Official (Independent) Director

Dr. Ajai Bhandari

Member

Part-Time Non-Official (Independent) Director

Our Director (Personnel) is a permanent special invitee on the HR, Nomination and Remuneration Committee and our Company Secretary is the secretary of the HR, Nomination and Remuneration Committee.

Scope and terms of reference:                       

Terms of reference for the HR, Nomination and Remuneration Committee are as follows:

  1. To decide the annual bonus / variable pay pool Performance Related Pay (PRP) and policy for its distribution across the executives (including Board Level executives) and non-unionised supervisors within the prescribed limits for each financial year.
  2. To examine all the proposals related to HR issue and give its recommendations.
  3. The recommendations of the “HR, Nomination and Remuneration Committee” are placed before the Board of Directors for approval.

 c.  CSR & Sustainability Committee

The CSR & Sustainability Committee was re-constituted on February 9, 2018. It presently comprises of the following members:

Name of the Directors

Position in the Committee

Designation

Kanwaljit Deol

Chairman

Part-Time Non-Official (Independent) Director

Cmde Sanjeev Nayyar, IN (Retired)

Member

Director (Shipbuilding)

Asit Kumar Nanda

Member

Director (Personnel)

Our Company Secretary is the secretary of CSR & Sustainability Committee

Scope and terms of reference:

Terms of reference for the CSR & Sustainability Committee are as follows:

  1. Formulate and recommend to the Board, a Corporate Social Responsibility and Sustainability Policy which shall indicate the activities to be undertaken by the Company as specified in Schedule - VII of the Companies Act, 2013.
  2. Recommend amount of expenditure to be incurred on CSR activities.
  3. Monitor the Corporate Social Responsibility and Sustainability Policy of the Company and its effective implementation from time to time.

d. Stakeholders Relationship Committee

The Stakeholders Relationship Committee was constituted pursuant to the Board Resolution passed on November 14, 2017. It presently comprises of the following members:

Name of the Directors

Position in the Committee

Designation

Bharat Bhushan

Chairman

Part-Time Non-Official (Independent) Director

Kanwaljit Deol

Member

Part-Time Non-Official (Independent) Director

Sarvjit Singh Dogra

Member

Director (Finance)

Asit Kumar Nanda

Member

Director (Personnel)

Scope and terms of reference:

The Committee shall consider and resolve the grievances of the security holders of the listed entity including complaints related to transfer of shares, non-receipt of annual report and non-receipt of declared dividends.

Apart from the abovementioned committees our Company has also constituted the following Committees:

  1. Risk Management Steering Committee

Pursuant to the Risk Management Policy of our Company approved vide a Board resolution dated August 25, 2014, the Risk Management Steering Committee was constituted vide C&MD’s Ty Order No. 19/15 dated May 5, 2015, which currently consists of:

Name of the Directors

Position in the Committee

Designation

Cmde Sanjeev Nayyar, IN (Retired)

Chairman

Director (Shipbuilding)

Asit Kumar Nanda

Member

Director (Personnel)

Sarvjit Singh Dogra

Member

Director (Finance)

Arun Ratan Pal

Member

CGM (ERP)

The terms of reference of the risk management steering committee of our Company include the following:

  1. Lead the Risk management initiative within the Company.
  2. Set standards for risk documentation and monitoring.
  3. Recommend training programs for staff with specific risk management responsibilities.
  4. Review and approve the risk management report including selection of critical risks to be put before the Board.
  5. The Risk Management Steering Committee shall be responsible for reviewing the risk appetite of the company on a yearly basis and revising the same based on changes in internal/ external business environment and stakeholder expectations.

b.  IPO Committee

In addition to above committees, our Board has also constituted an IPO Committee pursuant to a resolution dated November 14, 2017, which currently consists of

Name of the Directors

Position in the Committee

Designation

RAdm Vipin Kumar Saxena, IN (Retired)

Chairman

Chairman & Managing Director

Ashwani Kumar Mahajan

Member

Government Nominee Director

Sarvjit Singh Dogra

Member

Director (Finance)


The terms of reference of the IPO Committee of our Company include the following:

  1. Approve the Restated/ Audited Financial Statements for inclusion in the DRHP and/ or this RHP and/ or the Prospectus as the case may be in connection with this Offer.
  2. Approve, adopt and file the DRHP, RHP and the Prospectus for this Offer, with SEBI, the RoC, of the State in which the Corporate Office of the Company is located and/or the Stock Exchanges, as the case may be, and to make any corrections or alterations therein.
  3. Finalise, approve, execute and deliver or arrange the delivery of this Offer Agreement, Syndicate Agreement, Underwriting Agreement, Share Escrow Agreement, certificates, Registrar Agreement and all other documents, agreements and instruments as may be required or desirable in relation to this Offer and any amendments, supplements, notices or corrigenda thereto, together with any summaries thereto, as may be required or desirable in connection with this Offer of the Equity Shares by the Company;
  4. Open with the Bankers to this Offer such account as are required by the regulations issued by SEBI.
  5. Open and operate bank accounts of the Company in such name and style as may be decided for the handling/ collecting/ refund for this Offer and to authorize one or more officers of the CPSE to execute all documents/ deeds as may be necessary for this Offer;
  6. Make applications to the RBI and such other authorities as may be required for the purpose of Allotment of Equity Shares to Non-Resident Investors.
  7. Approve all actions required to dematerialize the Equity Shares of the Company;
  8. Do all such acts, deeds, matters and things and execute all such other documents etc. as it may, in its absolute discretion, deem necessary or desirable for such purpose, including without limitation, to Allot the Equity Shares to the successful Allottees as permissible in law, issue of share certificates in accordance with the relevant rules;
  9. Make applications for listing of the Equity Shares of the Company and to execute and to deliver or arrange the delivery of necessary documentation to the concerned Stock Exchange(s).
  10. Take all action as may be necessary or authorized in connection with this Offer;
  11. Seek the admission of the Company’s Equity Shares into the CDSL and the NSDL;
  12. Seek, if required, the consent of the Company’s lenders, parties with whom the Company has entered into various commercial and other agreements, all concerned Government and regulatory authorities in India or outside India, and any other consents that may be required in connection with the IPO.

 

ORGANIZATION STRUCTURE OF OUR COMPANY

 Key Management Personnel and Senior Management Personnel

The following persons are the Key Management Personnel of our Company:

  1. RAdm Vipin Kumar Saxena, IN (Retired), Chairman & Managing Director;
  2. Sarvjit Singh Dogra, Director (Finance) & CFO;
  3. Asit Kumar Nanda, Director (Personnel);
  4. Cmde Sanjeev Nayyar, IN (Retired), Director (Shipbuilding); and
  5. Sandeep Mahapatra, Company Secretary and Compliance

In addition to the persons mentioned above, the following persons are Senior Management Personnel of our Company:

  1. Arup Ratan Pal, CGM (ERP, YM)
  2. Dumpala Vijayam, CGM (Engineering, DEP)
  3. Cmde PR Hari, IN (Retired), CGM (PP & C)
  4. Dibyendu Maitra, CGM (Main Works Unit)
  5. Siddhartha Ray, GM (Finance)
  6. Captain Jagmohan, IN (Retired), GM (Design)
  7. Venkatesh Murthy, GM (Material)
  8. Abhaya Kumar Mahapatro, GM (HR & Administration)
  9. Commander Soumya Choudhury, IN (Retired) GM (FOJ)
  10. Commander Bhaskar Sengupta, IN (Retired), GM (QA, VD and IE&P)
  11. DIG (Retired) Subrato Ghosh, GM (Rajabagan Dockyard)
  12. Commander Bhubaneshwar Mishra, IN (Retired), AGM In-charge (Taratala Unit)

All Key Management Personnel and Senior Management Personnel are permanent employees of our Company.

For details of RAdm Vipin Kumar Saxena, IN (Retired), Sarvjit Singh Dogra, Asit Kumar Nanda and Cmde Sanjeev Nayyar, IN (Retired) see “Our Management – Brief biographies of the Directors” on page 175.

Sandeep Mahapatra

Sandeep Mahapatra was appointed as a Company Secretary of our Company with effect from November 23, 2007. He was designated as the Compliance Officer of the Company for the purposes of SEBI Listing Regulations with effect from July 21, 2017. He is a member of the Institute of Company Secretaries of India. He also holds a degree in Master of Commerce and Bachelor of Law from Utkal University, Bhubaneswar. Prior to joining our Company, he worked as the Company Secretary of Bilati (Orissa) Limited from February 1, 1996 to September 30, 2007. He holds an experience of more than twenty-one (21) years in the Secretarial and Legal functions.

Brief Profiles of our Senior Management Personnel

Arup Ratan Pal

Arup Ratan Pal is the CGM (ERP & YM) of our Company. He has been associated with our Company since March 6, 2006. He holds a bachelor’s degree in Electrical Engineering from Jadavpur University and Post Graduate Diploma in Information Technology and Management from All India Management Association. He has over twenty-two (22) years of experience and was in the past associated with Suzlon Windfarm Services Limited, Alstom Projects India Limited, ABB Limited and NTPC Limited.

Dumpala Vijayam

Dumpala Vijayam is the CGM (Engg. & DEP) of our Company. He has been associated with our Company since October 25, 2011. He holds a bachelor’s degree in Mechanical Engineering from Kakatiya University and a Post Graduate Diploma in Industrial Engineering from the National Institute of Industrial Engineering (formerly known as National Institute for Training in Industrial Engineering). He has over twenty-eight (28) years of experience and was in the past associated with BEML Limited, Bharat Dynamics Limited, Hindustan Aeronautics Limited and The General Electric Company of India Limited.

Cmde PR Hari, IN (Retired)

Cmde PR Hari is the CGM (PP & C) of our Company. He has been associated with our Company since December 31, 2016. He holds a Bachelors’ degree in Mechanical Engineering from Jawaharlal Nehru University, New Delhi, Degree of Master of Science in Defence and Strategic Studies from the University of Madras. He has over twenty-eight (28) years of experience and was in the past associated with the Indian Navy as a Cmde.

Dibyendu Maitra

Dibyendu Maitra is the CGM (Main Works) of our Company. He has been associated with our Company since April 13, 1982. He holds a Bachelors’ degree in Mechanical Engineering from the University of Calcutta. He is also an associate member of the Institute of Cost and Works Accountants of India.

Siddhartha Ray

Siddhartha Ray is the GM (Finance) of our Company. He has been associated with our Company since August 20, 2007. He holds Bachelors’ degree in Statistics from the University of Calcutta and he is also an associate member of the Institute of Cost and Works Accountants of India. He has over twenty-one (21) years of experience and was in the past was associated with TIL Limited, The Jay Engineering Works Limited, Tirupati Jute Industries Private Limited and Steinhaus (India) Private Limited.  

Captain Jagmohan, IN (Retired)

Captain Jagmohan is the GM (Design) of our Company. He has been associated with our Company since April 4, 2016. He holds Bachelors’ degree in Naval Architecture and Shipbuilding from the Cochin University of Science and Technology, a diploma in Naval Construction from the IIT, Delhi and holds Masters’ Degree in Ocean Engineering from the IIT, Kharagpur. He has over twenty-six (26) years of experience and was in the past associated with the Indian Navy as a Captain.   

Venkatesh Murthy

Venkatesh Murthy is the GM (Material) of our Company. He has been associated with our Company since May 9, 2016. He holds a Bachelors’ degree in Mechanical Engineering from the University of Mysore. He has over twenty-three (23) years of experience and in the past, was associated with BEML Limited.

Abhaya Kumar Mahapatro

Abhaya Kumar Mahapatro is the GM (HR & Administration) of our Company. He has been associated with our Company since May 11, 2016. He holds a Bachelor’s (Honours) degree in Chemistry Hons from Berhampur University, Masters’ degree in Arts from Berhampur University and a diploma in Training and Development from Indian Society for Training and Development. He has over twenty-six (26) years of experience and in the past, was associated with Ferro Scrap Nigam Limited, Heavy Engineering Corporation Limited and United Bank of India.

Commander Soumya Choudhury, IN (Retired)

Commander Soumya Choudhury is the GM (FOJ) of our Company. He has been associated with our Company since November 12, 2007. He holds a Bachelors’ degree in Electrical Engineering from the University of North Bengal and Post Graduate Diploma in Operations Management from India Management Association. He has over twenty-four (24) years of experience and in the past, has been associated with Indian Navy as a Commander.

Commander Bhaskar Sengupta IN (Retired)

Commander Bhaskar Sengupta is the GM (QA, VD and IE&P) of our Company. He has been associated with our Company since January 18, 2010. He holds a Bachelor (Honours) degree in Naval Architecture from IIT, Kharagpur, a Diploma in Naval Construction from the IIT, Delhi and a Certificate in Master of Business Administration (Part Time) from Faculty of Management Studies, University of Delhi. He has over twenty-one (21) years of experience and in the past, has been associated with Indian Navy as a Commander.

DIG (Retired) Subrato Ghosh

Subrato Ghosh is the GM (Rajabagan Dockyard) of our Company. He has been associated with our Company since October 3, 2016. He holds a Bachelors’ degree in Mechanical Engineering from Dayalbagh Educational Institute (Deemed University), Agra, a Masters’ degree in Engineering (Mechanical Marine Engineering) from the University of Pune and holds a Masters’ degree in Business Administration from Jamia Millia Islamia, New Delhi. He has over twenty-nine (29) years of experience and in the past, has been associated with Indian Coast Guard and NCCBM.

Commander Bhubaneshwar Mishra, IN (Retired)

Bhubaneshwar Mishra is the AGM In-charge (Taratala Unit) of our Company, having joined our Company on January 17, 2013. He is qualified in Basic Engineering course from the Naval College of Engineering, Lonavala. He holds a post graduate diploma in Management from Jamnalal Bajaj Institute of Management Studies, University of Mumbai in collaboration with college of Naval Warfare at Karanja in the year 2007. Prior to joining our Company, he was associated with the Indian Navy.

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Last Reviewed and Updated on 28 February 2020

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